उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं, जिनमें सुनने की क्षमता कम होना भी शामिल है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, 60 साल के बाद यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। ईएनटी एक्सपर्ट बताते हैं कि उम्र के साथ कान के अंदर की कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं, जिससे आवाज सुनने की क्षमता धीरे-धीरे घटती है। इसके अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और लंबे समय तक तेज शोर में रहने से भी यह समस्या बढ़ सकती है।
क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण
सुनने की क्षमता कम होने के कुछ आम संकेत होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे सामान्य बातचीत सुनने में दिक्कत होना, बार-बार सामने वाले से बात दोहराने के लिए कहना, टीवी या मोबाइल की आवाज बढ़ाकर सुनना और भीड़ में आवाज साफ न सुनाई देना। अगर ये लक्षण दिखने लगें, तो तुरंत जांच करवाना जरूरी होता है ताकि समस्या को बढ़ने से रोका जा सके।
क्या इस समस्या का इलाज संभव है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक बार सुनने की क्षमता कम होने लगे तो उसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। हालांकि सही समय पर इलाज और सावधानी से इसे ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है। इसके लिए हियरिंग टेस्ट कराया जाता है, जिससे यह पता चलता है कि सुनने की क्षमता कितनी कम हो गई है और उसी आधार पर आगे का इलाज तय किया जाता है।
कब जरूरी होती है हियरिंग मशीन
जब सुनने में ज्यादा परेशानी होने लगे, बार-बार बात दोहरानी पड़े या हियरिंग टेस्ट में मध्यम से गंभीर स्तर का हियरिंग लॉस सामने आए, तब हियरिंग मशीन लगाने की सलाह दी जाती है। यह मशीन सुनने में मदद करती है और बुजुर्गों में अकेलेपन की समस्या को भी कम करती है। इसलिए अगर घर में किसी बुजुर्ग को ऐसी परेशानी हो रही है, तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
