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भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी क्यों: क्या यें मुद्दे बने रोड़ा, जाने सब कुछ

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी क्यों: क्या यें मुद्दे बने रोड़ा, जाने सब कुछ

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक बातचीत एक बार फिर अटक गई है। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं, लेकिन कई मुद्दों पर सहमति न बन पाने के कारण यह समझौता अभी तक अंतिम रूप नहीं ले सका है।

रिपोर्ट के मुताबिक इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा है अमेरिका से आयातित डेयरी उत्पादों, खासकर "मांसाहारी दूध" को लेकर भारत का सख्त रुख। इसके अलावा, टैरिफ, कृषि उत्पाद, और अन्य व्यापारिक बाधाएं भी इस देरी का कारण बन रही हैं।

बता दें भारत में दूध केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक से जुड़ा हुआ है। गाय को "गौमाता" का दर्जा प्राप्त है, और दूध व घी का उपयोग पूजा-पाठ के लिए उपयोग किया जाता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जहां डेयरी सेक्टर 1.4 अरब की आबादी को पोषण और 8 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। भारतीय डेयरी उद्योग की कुल कीमत लगभग 9 लाख करोड़ रुपये है।

अमेरिका में गायों को खिलाए जाने वाले चारे में सस्ते प्रोटीन स्रोतों के रूप में मांस, खून, मछली, सूअर, मुर्गी, और यहां तक कि कुत्ते-बिल्लियों के अवशेष शामिल हो सकते हैं। इसे "ब्लड मील" के रूप में जाना जाता है, जिसमें लाइसिन जैसे एमिनो एसिड होते हैं, जो गायों के वजन और दूध उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं। हालांकि, भारत इसे "मांसाहारी दूध" मानता है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक के खिलाफ है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह ऐसी गायों से प्राप्त दूध या डेयरी उत्पादों को आयात करने की अनुमति नहीं देगा। इसके लिए भारत ने सख्त शर्त रखी है, जिसमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आयातित दूध केवल शाकाहारी चारा खाने वाली गायों से मिला हो...

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे चारे से गायों में बीएसई (Bovine Spongiform Encephalopathy) जैसी बीमारियां हो सकती हैं, जो मनुष्यों में भी फैल सकती हैं। इसके अलावा, गायों का पाचन तंत्र मांस पचाने के लिए नहीं बना है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। आर्थिक रूप से, अमेरिकी डेयरी उत्पादों के आयात से भारत के डेयरी सेक्टर को भारी नुकसान हो सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अनुसार, यदि अमेरिका से डेयरी आयात शुरू होता है, तो भारत को प्रतिवर्ष 1.03 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। भारत का डेयरी सेक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, और इसका वैश्विक दूध उत्पादन में 22% हिस्सा है।

अमेरिका ने 2 अप्रैल 2025 को भारतीय उत्पादों पर 26% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसे 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया था। यह समयसीमा 9 जुलाई 2025 को समाप्त हो चुकी है, और अब अमेरिका इस टैरिफ को लागू कर सकता है। भारत चाहता है कि यह 26% टैरिफ पूरी तरह हटाया जाए और स्टील व ऑटो पार्ट्स पर पहले से लागू अमेरिकी शुल्कों में छूट दी जाए। वहीं, अमेरिका भारत से सोयाबीन, मक्का, कार, और शराब जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने की मांग कर रहा है। भारत अपने किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों को ध्यान में रखते हुए कृषि और डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह खोलने के पक्ष में नहीं है, खासकर जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) उत्पादों के लिए। भारत कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 100% से अधिक टैरिफ लगाता है, जिसे अमेरिका खत्म करने की मांग कर रहा है।

जुलाई 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अंतिम चरण में थी, और 8 जुलाई को समझौते की घोषणा की उम्मीद थी। भारतीय वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने वाशिंगटन में इसकी अगुवाई की थी। हालांकि, डेयरी और कृषि जैसे संवेदनशील मुद्दों पर असहमति के कारण यह डील अब तक पूरी नहीं हो सकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि वह भारतीय बाजारों तक पहुंच हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं, और जल्द ही इस दिशा में प्रगति होगी। दूसरी ओर, भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को प्राथमिकता देगा।

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