SIR पर सुप्रीम की बड़ी मुहर, चुनाव आयोग को राहत, बिहार से शुरू विवाद पर खत्म हुई बड़ी बहस, पढ़ें फैसला !
सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR प्रक्रिया को वैध करार देते हुए चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करता है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने बिहार में लागू SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया। इस निर्णय के बाद चुनाव आयोग की शक्तियों को लेकर चल रही बहस को नई दिशा मिल गई है।
अनुच्छेद 324 का मिला सहारा
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव आयोग को SIR कराने का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून चुनाव आयोग को किसी भी समय विशेष पुनरीक्षण की अनुमति देता है। इसलिए केवल इस आधार पर प्रक्रिया को गलत नहीं कहा जा सकता कि वह नियमित प्रक्रिया से अलग दिखाई देती है।
कानून नहीं बदला गया
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी साफ किया कि SIR प्रक्रिया किसी कानून को बदलती या हटाती नहीं है। कोर्ट के मुताबिक यह प्रक्रिया मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर रहकर काम करती है। अदालत ने कहा कि आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर कोई कदम नहीं उठाया। इसलिए प्रक्रिया को असंवैधानिक नहीं माना जा सकता।
चुनाव से सीधा जुड़ा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं होते। उसकी बुनियाद सही और भरोसेमंद मतदाता सूची होती है। अदालत ने माना कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, पलायन और मतदाता सूची में लगातार बदलाव के कारण समय-समय पर गहन जांच जरूरी हो सकती है। SIR का उद्देश्य भी इसी व्यवस्था को मजबूत करना है।
याचिकाकर्ताओं की दलील खारिज
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया नागरिकता की दोबारा जांच जैसी है और इससे मतदाताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कुछ लोगों ने इसे NRC जैसी प्रक्रिया भी बताया था। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं कर रहा बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित कर रहा है।
अब कई राज्यों पर नजर
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में यह प्रक्रिया जारी है। इस फैसले के बाद अब चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची सुधार को लेकर आगे की गतिविधियों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
