कीवी अब सिर्फ विदेशी फल नहीं रह गया है। भारत में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। लोग इसे स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी पसंद कर रहे हैं। आमतौर पर कीवी की खेती का नाम आते ही हिमाचल या कश्मीर का ख्याल आता है, लेकिन असल तस्वीर कुछ और है। भारत में सबसे ज्यादा कीवी की खेती अरुणाचल प्रदेश में होती है और यही राज्य देश में कीवी उत्पादन का बड़ा केंद्र बन चुका है।
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में कीवी उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से पहचान बनाई है। यहां से तैयार होने वाली कीवी देश के कई बड़े शहरों तक पहुंचती है और गुणवत्ता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
क्यों खास है यहां की जलवायु?
कीवी की खेती के लिए बहुत ज्यादा गर्म या अत्यधिक ठंडा मौसम सही नहीं माना जाता। अरुणाचल प्रदेश की जलवायु इस फल के लिए अनुकूल मानी जाती है। पहाड़ी इलाकों में अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और संतुलित तापमान की वजह से यहां कीवी की पैदावार बेहतर होती है। किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर अब बड़े स्तर पर कीवी उत्पादन को अपनाना शुरू कर दिया है।
ऐसे होती है कीवी की खेती
कीवी के पौधों को सामान्य पेड़ों की तरह नहीं उगाया जाता। इन्हें बेल की तरह लकड़ी और तार के सहारे ऊपर बढ़ाया जाता है ताकि पर्याप्त धूप और हवा मिल सके। खेती के दौरान सिंचाई, जैविक खाद और समय-समय पर छंटाई का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। इसी प्रक्रिया के बाद अच्छी गुणवत्ता वाले फल तैयार होते हैं।
सेहत के लिए क्यों खास मानी जाती है कीवी?
कीवी पोषक तत्वों से भरपूर फल मानी जाती है। इसमें विटामिन सी, फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। 100 ग्राम कीवी में लगभग 60 से 65 कैलोरी और पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी मौजूद होता है। इसे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला फल भी कहा जाता है। यह पाचन सुधारने, हृदय स्वास्थ्य और त्वचा की देखभाल में भी मददगार मानी जाती है।
घूमने वालों के लिए भी खास जगह
अरुणाचल प्रदेश सिर्फ खेती के लिए ही नहीं बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। यहां पहाड़, हरियाली और शांत वातावरण लोगों को आकर्षित करते हैं। तवांग मठ, ज़ीरो वैली और सेला पास जैसी जगहें यहां आने वालों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
सुपरफूड से बन रही नई पहचान
कीवी अब केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद फल नहीं बल्कि किसानों के लिए नई संभावनाओं का माध्यम भी बन रही है। अरुणाचल प्रदेश ने दिखाया है कि सही जलवायु और तकनीक के साथ खेती की दिशा बदलकर नई आर्थिक पहचान बनाई जा सकती है।
