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लंगड़ा आम का नाम कैसे पड़ा, बनारस के फकीर की कहानी ने बना दिया ‘फलों का सितारा’

लंगड़ा आम का नाम कैसे पड़ा, बनारस के फकीर की कहानी ने बना दिया ‘फलों का सितारा’

भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और उन्हीं में से एक खास किस्म है लंगड़ा आम। इसके नाम को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर इसे ‘लंगड़ा’ क्यों कहा जाता है। दरअसल, इसकी कहानी उत्तर प्रदेश के वाराणसी से जुड़ी है, जहां एक फकीर रहते थे जो चलने में असमर्थ थे और लंगड़ाकर चलते थे। उनके बाग में उगे इस खास आम को लोगों ने उसी पहचान से जोड़कर ‘लंगड़ा आम’ कहना शुरू कर दिया।

मेहनत और पहचान की मिसाल
कहा जाता है कि उस फकीर ने अपने छोटे से बाग की बहुत मेहनत से देखभाल की। एक दिन उन्होंने देखा कि एक पेड़ बाकी सभी पेड़ों से ज्यादा हरा-भरा और अलग है। जब उसके फल पके और लोगों ने उनका स्वाद चखा, तो मिठास और खुशबू ने सबका दिल जीत लिया। धीरे-धीरे यह आम पूरे इलाके में मशहूर हो गया। लोगों ने इसे उस फकीर की पहचान से जोड़ दिया और यही नाम समय के साथ स्थायी बन गया।

खास बनावट और जबरदस्त स्वाद
लंगड़ा आम की पहचान भी इसे अलग बनाती है। इसका आकार अंडाकार होता है और नीचे हल्का नुकीलापन होता है। सबसे खास बात यह है कि पकने के बाद भी इसका रंग हरा ही रहता है। इसका गूदा बेहद मुलायम, रसदार और बिना रेशे वाला होता है। स्वाद में मिठास और हल्की खटास का संतुलन इसे खास बनाता है। इसकी खुशबू इतनी आकर्षक होती है कि दूर से ही लोग इसकी ओर खिंच जाते हैं।

सेहत के लिए भी फायदेमंद
आम सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी होता है। इसमें विटामिन सी, विटामिन ए, पोटैशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। आंखों की रोशनी और त्वचा के लिए भी यह काफी फायदेमंद माना जाता है।

दूसरे आमों के नाम की भी खास कहानी
भारत में कई आम अपनी खास कहानियों के लिए मशहूर हैं। चौसा आम का नाम शेरशाह सूरी की जीत से जुड़ा है, जबकि दशहरी आम का नाम लखनऊ के दशहरी गांव पर पड़ा। अल्फांसो आम पुर्तगाली शासक के नाम से जुड़ा है और केसर आम अपने रंग और खुशबू के कारण जाना जाता है। इन सभी कहानियों से साफ है कि आम सिर्फ फल नहीं, बल्कि इतिहास और भावनाओं से जुड़ी पहचान भी हैं।

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