पश्चिम बंगाल चुनाव में सायनी घोष का एक लोकगीत इन दिनों बड़ी राजनीतिक बहस का कारण बन गया है। “हृदय मा छे काबा और नयने मदीना” गाकर उन्होंने अपनी सभाओं में अलग पहचान बनाई है। इस गीत को गाते वक्त जनता भी उनका साथ देती नजर आती है, जिससे यह तेजी से वायरल हो गया। हालांकि, इस गाने को लेकर अब सियासी विवाद गहराता जा रहा है और विरोधी दल इसे मुद्दा बना रहे हैं।
बीजेपी का तीखा हमला
इस गीत को लेकर योगी आदित्यनाथ ने चुनावी सभा में प्रतिक्रिया दी और कहा कि उनकी आस्था अलग है। वहीं गिरिराज सिंह समेत कई नेताओं ने भी इस गीत को लेकर सायनी घोष पर निशाना साधा है। बीजेपी का आरोप है कि इस तरह के गीतों के जरिए वोट बैंक को साधने की कोशिश की जा रही है, जिससे चुनावी माहौल और ज्यादा गरमा गया है।
लोकगीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जिस गीत को लेकर विवाद हो रहा है, उसे बांग्लादेश के मशहूर कवि अब्दुल रहमान बोयाती ने लिखा था। यह लोकगीत लंबे समय से बंगाल और बांग्लादेश में लोकप्रिय रहा है। इससे पहले भी मदन मित्रा द्वारा इसे गाने पर विवाद खड़ा हुआ था। इस बार चुनावी माहौल में इसके इस्तेमाल ने इसे फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
फिल्मी दुनिया से राजनीति तक सफर
सायनी घोष ने अपने करियर की शुरुआत अभिनय से की थी और बाद में राजनीति में कदम रखा। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें आगे बढ़ाया। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जादवपुर सीट से जीत दर्ज कर अपनी मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई। उनकी आक्रामक और चुटीली शैली के कारण उनके भाषण भी अक्सर वायरल होते रहते हैं।
चुनाव में बढ़ती अहमियत
बंगाल चुनाव में इस बार महिलाओं और शहरी मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। सायनी घोष की सभाओं में भीड़ और उनका जुड़ाव इस बात का संकेत दे रहा है कि वह पार्टी के लिए बड़ा चेहरा बनती जा रही हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गीत चुनावी फायदा देता है या विवाद का असर वोटिंग पर पड़ता है।
