केजरीवाल बनाम जस्टिस स्वर्णकांता: कोर्ट से सड़क तक बढ़ी लड़ाई, आरोप-पलटवार से गरमाया मामला, पढ़ें टाइमलाइन
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 27 फरवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि पर्याप्त सबूत नहीं हैं। लेकिन यह फैसला अंतिम नहीं रहा। जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया और यहीं से इस केस का नया अध्याय शुरू हुआ।
हाईकोर्ट पहुंचते ही बढ़ा विवाद
9 मार्च को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन सभी पक्षों से जवाब मांगा। इसके बाद मामला लगातार आगे बढ़ता गया। 16 मार्च को फिर सुनवाई हुई, जिसमें केजरीवाल और अन्य आरोपियों को जवाब दाखिल करने का समय दिया गया। इस बीच मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि संवेदनशील बहस का विषय बन गया।
जज बदलने की मांग से पहुंचा मामला सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई से पहले केजरीवाल ने बड़ा कदम उठाते हुए जज बदलने की मांग की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से निष्पक्ष सुनवाई की आशंका है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी। इससे पहले हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी इस मांग को ठुकरा चुके थे।
अदालत में खुद पैरवी और गंभीर आरोप
6 अप्रैल और 13 अप्रैल की सुनवाई में केजरीवाल खुद कोर्ट में पेश हुए और अपनी पैरवी खुद की। उन्होंने जज पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि फैसलों में एक पैटर्न दिखता है। उन्होंने जज के पारिवारिक संबंधों और कथित हितों के टकराव का मुद्दा भी उठाया। दूसरी तरफ सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन आरोपों को निराधार बताया और अदालत की गरिमा पर सवाल बताया।
जज का सख्त जवाब और याचिका खारिज
20 अप्रैल की सुनवाई में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सभी आरोपों पर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना पक्षपात नहीं है और उनके परिवार का इस केस से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल आशंका के आधार पर जज को हटाना गलत उदाहरण होगा। आखिरकार उन्होंने खुद को केस से अलग करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।
सत्याग्रह के ऐलान से बढ़ा राजनीतिक तापमान
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब केजरीवाल ने अदालत में पेश न होने और ‘सत्याग्रह’ करने का ऐलान कर दिया। इससे यह मामला अब सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस केस की दिशा और असर दोनों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
