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दुनिया के सबसे क्रूर शासक 'किम जोंग उन' को क्यों सता रहा मौत का डर?

दुनिया के सबसे क्रूर शासक 'किम जोंग उन' को क्यों सता रहा मौत का डर?

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की जिंदगी हमेशा रहस्यों से घिरी रही है। दुनिया उन्हें एक क्रूर तानाशाह के रूप में जानती है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों से लगता है कि मौत का डर उन्हें लगातार सता रहा है। हाल ही में चीन की यात्रा के दौरान उनकी पैरानॉया (पैरानोइड व्यवहार) की खबरें सुर्खियां बनीं, जहां उन्होंने अपनी जैविक निशानियां मिटाने के लिए असाधारण कदम उठाए। इसी बीच, किम चीन के साथ दोस्ती को "और जोरदार तरीके से" बढ़ाने की बात कर रहे हैं। आखिर क्या है इसकी वजह?

किम जोंग उन का जन्म 1984 में हुआ था, हालांकि उनकी जन्मतिथि को लेकर हमेशा विवाद रहा है। वे उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल सुंग के पोते और पूर्व नेता किम जोंग इल के पुत्र हैं। 2011 में पिता की मौत के बाद मात्र 27-28 साल की उम्र में उन्होंने सत्ता संभाली। उनकी सत्ता हासिल करने की प्रक्रिया बेहद निर्दयी थी। उन्होंने अपने चाचा जांग सोंग थेक को 2013 में फांसी पर चढ़वा दिया, जो उनके पिता के करीबी थे। इसके अलावा, सौतेले भाई किम जोंग नाम की 2017 में मलेशिया में हत्या करवा दी गई, जिसके पीछे उत्तर कोरियाई एजेंटों का हाथ माना जाता है।

किम का शासन मानवाधिकार उल्लंघनों से भरा पड़ा है। उनके 10 सालों के शासन में लाखों लोग राजनीतिक कैद शिविरों में कैद हैं, जहां यातनाएं और भुखमरी आम है। उन्होंने परमाणु हथियार कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया, जिससे उत्तर कोरिया अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का शिकार हुआ। दुनिया उन्हें "सबसे क्रूर शासक" कहती है क्योंकि उन्होंने विरोधियों को कुत्तों से फड़वाने या एंटी-एयरक्राफ्ट गन से उड़ाने जैसे क्रूर तरीके अपनाए हैं। उनके शासन में उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, लेकिन उन्होंने सुधारों की बजाय सैन्य ताकत पर जोर दिया।

मौत का डर क्यों?

किम जोंग उन की सेहत को लेकर अफवाहें सालों से चल रही हैं। 2020 में वे कई हफ्तों तक गायब रहे थे, जिससे उनकी मौत की खबरें उड़ीं। वे मोटापे, डायबिटीज और हृदय रोगों से जूझते नजर आते हैं। सिगार और शराब की लत ने उनकी सेहत को और बिगाड़ा है। हाल ही में सितंबर 2025 में चीन की यात्रा के दौरान उनकी पैरानॉया सामने आई। उन्होंने अपना खुद का शौचालय साथ ले जाकर इस्तेमाल किया और मीटिंग के बाद स्टाफ ने उनके इस्तेमाल किए गिलास और अन्य चीजों को साफ करके जैविक निशानियां मिटाईं। यह व्यवहार दर्शाता है कि किम को डर है कि उनकी डीएनए या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दुश्मनों के हाथ लग सकती है, जो उनके खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पैरानॉया सिर्फ स्वास्थ्य से नहीं, बल्कि हत्या के डर से भी जुड़ी है। उत्तर कोरिया में सत्ता संघर्ष हमेशा रहा है, और किम ने कई अधिकारियों को मार गिराया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद भी इसी तरह की सफाई की गई। इसके अलावा, चीन में हुई एक अनौपचारिक बातचीत में शी जिनपिंग और पुतिन ने "150 साल तक जीने" की संभावना पर चर्चा की, जो लंबी उम्र और स्वास्थ्य के प्रति नेताओं की चिंता को दर्शाती है।

चीन से बढ़ती दोस्ती, रणनीतिक जरूरत या मजबूरी?

उत्तर कोरिया और चीन की दोस्ती पुरानी है, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें उतार-चढ़ाव आए। 2025 में किम ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और संबंधों को "और जोरदार तरीके से" मजबूत करने का वादा किया। किम ने बीजिंग में सैन्य परेड में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने चीन के समर्थन की सराहना की।

क्यों बढ़ा रही है यह दोस्ती? विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और दक्षिण कोरिया से बढ़ते खतरे के बीच किम को चीन की जरूरत है। उत्तर कोरिया आर्थिक रूप से चीन पर निर्भर है – 90% व्यापार चीन से होता है। परमाणु कार्यक्रम के कारण लगे प्रतिबंधों ने स्थिति बिगाड़ी है। मौत के डर से किम शायद चीन को एक मजबूत सहयोगी के रूप में देख रहे हैं, जो उन्हें सुरक्षा दे सकता है। चीन भी उत्तर कोरिया को बफर जोन के रूप में इस्तेमाल करता है, लेकिन किम की पैरानॉया से संबंधों में तनाव भी आ सकता है। पुरानी रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन किम के भाई को सुरक्षित रखकर वैकल्पिक विकल्प तैयार रखता है।

उत्तर कोरिया का भविष्य

किम जोंग उन का शासन जारी है, लेकिन उनकी 13 साल की बेटी किम जू ए की हालिया चीन यात्रा ने उत्तराधिकार की अटकलों को हवा दी। क्या मौत का डर उन्हें परिवार को आगे लाने के लिए मजबूर कर रहा है? दुनिया उत्तर कोरिया को अलग-थलग करने की कोशिश कर रही है, लेकिन किम की क्रूरता और रणनीति उन्हें मजबूत बनाए हुए है।

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कितना ताकतवर है उत्तर कोरिया?

उत्तर कोरिया की सेना दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है। 2025 में ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स (GFP) के अनुसार, उत्तर कोरिया 145 देशों में 34वें स्थान पर है, जिसका पावर इंडेक्स स्कोर 0.6016 है। इसकी सक्रिय सेना में लगभग 1.3 मिलियन सैनिक हैं, जो क्षेत्रीय शक्तियों से ज्यादा है। इसके अलावा, 7 मिलियन से ज्यादा रिजर्व फोर्स हैं, जो इसे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सैन्य संगठन बनाते हैं।

उत्तर कोरिया के पास 18,288 सैन्य वाहन हैं, जिनमें 4,344 टैंक, 1,500 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) और 2,000 आर्टिलरी यूनिट शामिल हैं। हालांकि, इसकी वायुसेना और नौसेना में गुणवत्ता की कमी है – पुराने विमान और जहाजों पर निर्भरता ज्यादा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अनुसार, उत्तर कोरिया दशकों में अपनी सबसे मजबूत रणनीतिक स्थिति में है, लेकिन तकनीकी रूप से दक्षिण कोरिया से पीछे है। साइबर वारफेयर और ड्रोन विकास में भी प्रगति हो रही है, जो इसे आधुनिक युद्ध के लिए तैयार कर रहा है।

दुनिया के लिए खतरा

उत्तर कोरिया की असली ताकत उसके परमाणु कार्यक्रम में है। 2025 में संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के बावजूद, देश ने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। उत्तर कोरिया ने खुद को परमाणु हथियार संपन्न देश घोषित किया है और कहा है कि यह स्थिति "अपरिवर्तनीय" है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि योंगब्योन और कांगसोन सुविधाओं से सालाना 215-232 किलोग्राम हाईली एनरिच्ड यूरेनियम (HEU) उत्पादन हो सकता है। हाल ही में ह्वासोंग-20 जैसी नई परमाणु मिसाइल का ऐलान किया गया, जो लंबी दूरी की क्षमता रखती है। उत्तर कोरिया ने परमाणु काउंटरस्ट्राइक ड्रिल भी किए, जो अमेरिका और दक्षिण कोरिया के लिए चेतावनी है। हालांकि, परमाणु हथियारों की संख्या गुप्त है, लेकिन यह दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।

आर्थिक स्थिति

आर्थिक रूप से उत्तर कोरिया कमजोर है। 2025 में इसका नाममात्र जीडीपी लगभग 32 अरब डॉलर अनुमानित है, जबकि पीपीपी आधार पर 40 अरब डॉलर। 2024 में अर्थव्यवस्था 3.7% की दर से बढ़ी, जो 8 सालों में सबसे तेज है, मुख्य रूप से रूस और चीन से व्यापार के कारण।

प्रति व्यक्ति आय मात्र 1,239 डॉलर है, जो दक्षिण कोरिया के 3.4% के बराबर है। 2025 में जीडीपी 18.45 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। प्रतिबंधों के कारण अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है, लेकिन निर्माण, विनिर्माण और निर्यात में वृद्धि देखी गई। हेरिटेज फाउंडेशन के अनुसार, उत्तर कोरिया की आर्थिक स्वतंत्रता स्कोर 3 है, जो दुनिया में सबसे कम है।

रूस और चीन पर निर्भरता

उत्तर कोरिया के 160 देशों से राजनयिक संबंध हैं, लेकिन मुख्य सहयोगी रूस और चीन हैं। 2024 में रूस के साथ म्यूचुअल सिक्योरिटी ट्रीटी साइन की गई, जो सैन्य सहयोग बढ़ा रही है। उत्तर कोरिया रूस की यूक्रेन जंग में मदद कर रहा है, जो वैश्विक चिंता का विषय है।

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ तनाव जारी है। हालांकि, रूस-चीन-उत्तर कोरिया गठबंधन को ज्यादा मजबूत नहीं माना जाता, क्योंकि चीन और रूस के बीच मतभेद हैं। उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण से इनकार कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं को प्रभावित कर रहा है।

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