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मिलने दो या न दो “न्याय तो दो”– हरिओम वाल्मीकि के परिवार से मिलने पहुंचे राहुल गांधी ने उठाए सवाल

मिलने दो या न दो “न्याय तो दो”– हरिओम वाल्मीकि के परिवार से मिलने पहुंचे राहुल गांधी ने उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में मॉब लिंचिंग की शिकार बने दलित युवक हरिओम वाल्मीकि के परिवार से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक भावुक मुलाकात की। इस दौरान परिवार के सदस्यों को गले लगाते हुए राहुल ने उन्हें ढांढस बंधाया और न्याय का पूरा भरोसा दिलाया। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में राहुल ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर परिवार को धमकाने और बंधक बनाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "परिवार को घर में बंद कर रखा गया है, उन्हें मुझसे न मिलने के लिए धमकाया गया। मिलने दो या न दो, लेकिन न्याय तो दो।

यह मामला 2 अक्टूबर को रायबरेली के ऊंचाहार क्षेत्र के जमुनापुर गांव के पास शुरू हुआ था। फतेहपुर के रहने वाले 28 वर्षीय हरिओम वाल्मीकि चोरी के संदेह में एक उग्र भीड़ के हाथों पीट-पीटकर मारे गए थे। वीडियो फुटेज में साफ दिखा कि हरिओम ने अपनी जान बचाने के लिए राहुल गांधी का नाम लिया, लेकिन भीड़ ने उनकी किसी नहीं सुनी। इस घटना ने पूरे देश में दलितों पर अत्याचार के खिलाफ आक्रोश पैदा कर दिया। पुलिस ने अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन परिवार का आरोप है कि सभी मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं।

हरिओम के परिवार में उनकी पत्नी संगीता, छोटी बेटी अनन्या, मां, पिता, भाई शिवम और बहनें शामिल हैं। घटना के बाद योगी सरकार ने परिवार को आर्थिक सहायता (10 लाख रुपये), बहन को आउटसोर्सिंग नर्स की नौकरी और अन्य सुविधाएं प्रदान कीं। मुख्यमंत्री योगी ने भी 12 अक्टूबर को परिवार से मुलाकात की थी। फिर भी, राहुल गांधी का दावा है कि ये कदम केवल दिखावा हैं और असली न्याय नहीं मिल रहा।

राहुल की यात्रा

राहुल गांधी शुक्रवार सुबह दिल्ली से कानपुर एयरपोर्ट पर उतरे और सड़क मार्ग से फतेहपुर पहुंचे। उनके काफिले को हरिओम के घर तुराबअली का पुरवा मोहल्ले तक पहुंचने में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का सामना करना पड़ा। राहुल के आने से ठीक एक घंटे पहले हरिओम के छोटे भाई शिवम वाल्मीकि ने एक वीडियो जारी कर कहा था, "हम राहुल गांधी या किसी राजनीतिक नेता से नहीं मिलेंगे। हम सरकार से संतुष्ट हैं।" इस वीडियो के वायरल होते ही राजनीतिक हलकों में सनसनी फैल गई।

कांग्रेस नेताओं ने इसे प्रशासनिक दबाव का नतीजा बताया। राहुल के काफिले को रोक लिया गया, लेकिन बातचीत के बाद परिवार ने मुलाकात की सहमति दी। लगभग 25-30 मिनट चली इस मुलाकात में हरिओम की मां फफक-फफक कर रो पड़ीं। राहुल ने उन्हें गले लगाया, बहन को सांत्वना दी और पिता व भाई से गहन बातचीत की। बाहर निकलते हुए राहुल ने परिवार का बयान साझा किया: "राहुल गांधी जी हमारे लिए मसीहा हैं। हम चाहते हैं कि वे हमें न्याय दिलाएं।"

राहुल के बयान:

मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से कहा, "हरिओम की नृशंस हत्या ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। उनके परिवार की आंखों में सिर्फ दर्द ही नहीं, बल्कि एक सवाल भी है – क्या इस देश में दलित होना अब भी जानलेवा गुनाह है?" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परिवार को 'बंधक' बना रखा है। "उन्हें धमकाया गया, वीडियो बनवाया गया कि वे मुझसे न मिलें। पुलिस और प्रशासन परिवार को डरा-धमका रहा है। गुनहगारों की ढाल बनकर खड़े हैं।"

राहुल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की, "परिवार की सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करें। पूरे देश में दलितों पर हत्याएं और बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं। न्याय न मिला तो हम कोर्ट तक लड़ेंगे।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर संभव मदद करेगी, चाहे वह कानूनी सहायता हो या सामाजिक समर्थन। राहुल ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का संकेत दिया, खासकर आगामी चुनावों के मद्देनजर।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे "दलित उत्पीड़न का प्रतीक" बताया और कहा कि राहुल की यात्रा से पीड़ित परिवार को मजबूती मिली है। वहीं, भाजपा नेताओं ने राहुल पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया। विधायक मनोज पांडेय, जो पहले परिवार के साथ मुख्यमंत्री से मिले थे, ने कहा, "सरकार ने त्वरित कार्रवाई की है। राहुल जी का आना केवल वोट बैंक की राजनीति है।" जिला प्रशासन ने मुलाकात के बाद भी घर पर भारी पुलिस बल तैनात रखा, जबकि मीडिया को अंदर जाने से रोका गया।

राहुल के जाने के बाद परिवार ने कांग्रेस को धन्यवाद दिया, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि उनका मकसद न्याय है, न कि राजनीति। इस घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में दलित सुरक्षा और मॉब लिंचिंग के खिलाफ बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राष्ट्रीय न्यायिक जांच का विषय बन सकता है।

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