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बंगाल में एग्जिट पोल का खेल: कमल बनाम दो पत्तियां, क्या इस बार बदलेगी तस्वीर?

बंगाल में एग्जिट पोल का खेल: कमल बनाम दो पत्तियां, क्या इस बार बदलेगी तस्वीर?

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान खत्म होते ही एग्जिट पोल ने सियासत को गरमा दिया है। सर्वे एजेंसियों के आंकड़ों ने एक बार फिर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है, जहां भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन सवाल वही पुराना है कि क्या ये आंकड़े सच साबित होंगे या फिर 2021 की तरह तस्वीर पलट जाएगी।

2021 ने तोड़ दिए थे सारे अनुमान
पिछले विधानसभा चुनाव में एग्जिट पोल ने मुकाबले को बेहद करीबी बताया था। कई सर्वे में भाजपा को बढ़त और कहीं त्रिशंकु विधानसभा की बात सामने आई थी। लेकिन असल नतीजों में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई। यानी एग्जिट पोल और वास्तविक नतीजों में जमीन-आसमान का फर्क दिखा।

अन्य राज्यों में कैसा रहा ट्रेंड
सिर्फ बंगाल ही नहीं, 2021 के चुनावों में कई राज्यों में एग्जिट पोल का मिला-जुला असर देखने को मिला। असम में अनुमान सही साबित हुए और भाजपा गठबंधन ने सत्ता बरकरार रखी। तमिलनाडु और केरल में भी ज्यादातर सर्वे सटीक रहे। पुदुचेरी में भी सत्ता परिवर्तन का अनुमान सही निकला। यानी एग्जिट पोल पूरी तरह गलत भी नहीं होते, लेकिन हर राज्य में इनकी विश्वसनीयता अलग-अलग रही।

2026 में क्यों बढ़ी दिलचस्पी
इस बार बंगाल का चुनाव इसलिए खास है क्योंकि राजनीतिक समीकरण पहले से ज्यादा जटिल हो चुके हैं। भाजपा लगातार अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। ऐसे में एग्जिट पोल के आंकड़े सिर्फ अनुमान हैं, असली तस्वीर मतगणना के दिन ही साफ होगी।

विश्वसनीयता पर फिर उठे सवाल
एग्जिट पोल की सटीकता को लेकर हमेशा बहस होती रही है। कभी ये पूरी तरह सही साबित होते हैं तो कभी पूरी तरह गलत। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सिर्फ एक संकेत देते हैं, अंतिम परिणाम नहीं। इसलिए इन्हें देखकर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी हो सकती है।

अब नजर 4 मई पर टिकी
फिलहाल सियासी गलियारों में चर्चा तेज है और हर दल अपनी जीत का दावा कर रहा है। लेकिन असली फैसला अब 4 मई को होगा, जब मतगणना के साथ साफ हो जाएगा कि बंगाल में कमल खिला या फिर दो पत्तियों का जादू बरकरार रहा। तब तक एग्जिट पोल सिर्फ एक सस्पेंस बने रहेंगे।

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