फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक नाम है वोजिन्हा का। केप वर्दे के 40 वर्षीय गोलकीपर ने विश्व चैंपियन रह चुकी स्पेन की टीम को गोल करने से रोककर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। स्पेन ने मैच में गेंद पर लगभग पूरा नियंत्रण रखा और कई बार गोल करने की कोशिश की, लेकिन हर बार वोजिन्हा उनके सामने दीवार बनकर खड़े रहे। नतीजा यह हुआ कि स्पेन जैसी मजबूत टीम एक भी गोल नहीं कर सकी और मुकाबला ड्रॉ पर खत्म हुआ। मैच के बाद हर तरफ सिर्फ वोजिन्हा की चर्चा होने लगी।
संघर्ष से भरा रहा शुरुआती जीवन
वोजिन्हा का असली नाम जोसिमर डायस है। उनका जन्म केप वर्दे के मिंडेलो शहर में हुआ था। आज जिस खिलाड़ी को पूरी दुनिया जान रही है, उसका जीवन आसान नहीं रहा। फुटबॉल से करियर बनाने से पहले उन्होंने बस ड्राइवर के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने बिजली मिस्त्री यानी इलेक्ट्रीशियन का काम भी किया। परिवार चलाने और अपने सपनों को जिंदा रखने के लिए उन्हें कई तरह की नौकरियां करनी पड़ीं। फुटबॉल के साथ-साथ काम करना उनकी मजबूरी थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
40 साल की उम्र में पूरा हुआ सबसे बड़ा सपना
वोजिन्हा ने केप वर्दे के लिए साल 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं बल्कि फुटबॉल में डेब्यू किया था और लंबे समय से राष्ट्रीय टीम का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने अफ्रीका कप जैसे बड़े टूर्नामेंट भी खेले, लेकिन फीफा वर्ल्ड कप खेलने का सपना 40 साल की उम्र में जाकर पूरा हुआ। खास बात यह रही कि अपने पहले ही वर्ल्ड कप मैच में उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। यह उपलब्धि उनके लंबे संघर्ष और मेहनत की सबसे बड़ी पहचान बन गई।
मां को याद कर भावुक हुए वोजिन्हा
स्पेन के खिलाफ शानदार प्रदर्शन के बाद वोजिन्हा भावुक भी नजर आए। उन्होंने बताया कि उनकी मां उन्हें मैदान में खेलते देखने नहीं आ सकीं क्योंकि उन्हें वीजा नहीं मिला था। मैच के बाद जब उन्होंने यह बात साझा की तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। इस कहानी ने दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों को भावुक कर दिया। अब उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही उनकी मां अमेरिका पहुंचकर अपने बेटे को विश्व कप में खेलते हुए देख सकेंगी। वोजिन्हा की कहानी बताती है कि मेहनत और धैर्य के दम पर सपने किसी भी उम्र में पूरे किए जा सकते हैं।
