गुजरात के साबरकांठा में हिंसा: भीड़ ने घरों और गाड़ियों को बनाया निशाना, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
गुजरात के साबरकांठा जिले के माजरा गांव में शुक्रवार रात को दो गुटों के बीच भड़की हिंसा ने पूरे इलाके को दहला दिया। पुरानी दुश्मनी के चलते भड़के इस झगड़े में करीब 10 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि 30 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 20 से ज्यादा संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है, और भारी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गई है। घटना के पीछे मंदिर प्रशासन और दीवाली उत्सव की तैयारियों को लेकर चली आ रही विवाद की बात सामने आ रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, माजरा गांव में रहने वाले दो प्रमुख समुदायों के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी शुक्रवार शाम को फिर से भड़क उठी। शुरुआत एक छोटे से विवाद से हुई, जब एक गुट ने स्थानीय मंदिर के प्रबंधन को लेकर दूसरे गुट पर आरोप लगाया। बात बढ़ते ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और भीड़ ने सड़कों पर खड़े वाहनों को आग लगा दी। जिले के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DySP) ए.के. पटेल ने बताया, "घटना के दौरान लगभग 10 लोगों को चोटें आई हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है। इन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।" उन्होंने यह भी कहा कि 10 चार-पहिया वाहनों और 20 दो-पहिया वाहनों सहित कुल 30 से ज्यादा गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा, कुछ घरों के बाहर भी तोड़फोड़ की गई।
पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचते ही हालात को काबू में करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया। रात भर चली यह जंग सुबह होते-होते थम गई, लेकिन गांव का माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है। अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 25 से 30 अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। एक FIR दर्ज कर ली गई है, जिसमें आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा के आरोप लगाए गए हैं। DySP पटेल ने चेतावनी दी, "हम किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएंगे। जिले भर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि शांति बनी रहे।"
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह विवाद दशकों पुराना है। माजरा गांव, जो साबरकांठा जिले के हिमतनगर तहसील के अंतर्गत आता है, एक शांतिपूर्ण कृषि-प्रधान इलाका रहा है। लेकिन दो प्रमुख समुदायों—जिन्हें गांव वाले 'ग्रुप ए' और 'ग्रुप बी' कहते हैं—के बीच मंदिर के नियंत्रण और उत्सवों की व्यवस्था को लेकर तनाव लंबे समय से बना हुआ है। एक बुजुर्ग निवासी, रामलाल पटेल (नाम परिवर्तित), ने बताया, "यह पहली बार नहीं है। पहले भी छोटे-मोटे झगड़े हुए हैं, लेकिन इस बार दीवाली की तैयारियां चल रही थीं, इसलिए बात बढ़ गई। मंदिर में पटाखों और पूजा की जिम्मेदारी को लेकर बहस हुई, जो हिंसा में बदल गई।" गांव की एक महिला, सीता बेन, ने आंसू भरी आवाज में कहा, "हमारे बच्चे डर गए हैं। रात भर चीखें सुनाई दे रही थीं। कब तक यह सिलसिला चलेगा?"
साबरकांठा जिला प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए गांव में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लगा दी हैं। जिलाधिकारी ने एक बयान जारी कर कहा कि शांति बहाली के लिए सामुदायिक संवाद आयोजित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं ग्रामीण भारत में सामुदायिक टकरावों का परिणाम हैं, जहां संसाधनों और परंपराओं पर नियंत्रण की होड़ अक्सर हिंसा का रूप ले लेती है। गुजरात सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपी पकड़े जाएंगे, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पुरानी दुश्मनी का अंतिम अध्याय होगा? गांव वाले उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन की सख्ती से शांति लौट आएगी और दीवाली का उत्सव बिना किसी बाधा के मनाया जा सकेगा।



