घर में सूखे या मुरझाए पौधों को रखना वास्तु के अनुसार अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे पौधे रुकी हुई ऊर्जा और ठहराव का संकेत माने जाते हैं। कहा जाता है कि इससे घर के माहौल पर असर पड़ता है और तरक्की में रुकावट आ सकती है। इसलिए अगर कोई पौधा लंबे समय से सूख चुका है तो उसे हटाना बेहतर माना जाता है।
दूध जैसा रस निकलने वाले पौधे
वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसे पौधे जिनकी टहनी या पत्तियां टूटने पर सफेद दूध जैसा पदार्थ निकलता है, उन्हें घर के अंदर रखने से बचना चाहिए। माना जाता है कि ये घर में अस्थिरता और तनाव बढ़ा सकते हैं। साथ ही कई बार ऐसे पौधे छोटे बच्चों और पालतू जानवरों के लिए भी सुरक्षित नहीं होते।
दीवारों पर चढ़ने वाली बेलें
दीवारों पर फैली बेलें देखने में खूबसूरत लग सकती हैं, लेकिन वास्तु में इन्हें बहुत शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि ये जीवन में रुकावट और ठहराव का संकेत बन सकती हैं। इसके अलावा ये दीवारों में नमी बढ़ाकर नुकसान भी पहुंचा सकती हैं और कीड़ों को आकर्षित कर सकती हैं।
प्लास्टिक के पौधे नहीं देते जीवंत ऊर्जा
आजकल लोग सजावट के लिए प्लास्टिक के पौधे घर में रखते हैं, क्योंकि उन्हें देखभाल की जरूरत नहीं होती। लेकिन वास्तु में इन्हें जीवंत ऊर्जा से खाली माना गया है। ये न हवा शुद्ध करते हैं और न ही प्राकृतिक ऊर्जा देते हैं। समय के साथ इन पर धूल जमने से घर का माहौल भी फीका लग सकता है।
काई और फफूंदी वाले पौधों से रहें दूर
अगर पानी में रखे पौधों या सजावटी फव्वारों में काई या फफूंदी जम जाए तो उसे तुरंत साफ करना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के मुताबिक ऐसी स्थिति सकारात्मक ऊर्जा को रोक सकती है और जीवन में ठहराव ला सकती है। इसलिए घर के पौधों की नियमित सफाई और देखभाल जरूरी मानी जाती है।
