भारतीय शतरंज खिलाड़ी वैशाली रमेशबाबू ने 2026 कैंडिडेट्स चेस टूर्नामेंट जीतकर इतिहास रच दिया है। वह यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। इस शानदार जीत के साथ उन्होंने साल के अंत में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली है। अब उनका सामना पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन जू वेनजुन से होगा, जिससे मुकाबला और भी रोमांचक होने वाला है।
रोमांचक मुकाबले में हासिल की जीत
वैशाली रमेशबाबू ने कड़े मुकाबले में बिबिसारा अस्सौबायेवा को आधे अंक के अंतर से हराकर यह खिताब अपने नाम किया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 8.5 अंक हासिल किए, जो उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस जीत के बाद अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ ने भी उन्हें बधाई दी। साथ ही भारत के महान खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने भी उनकी जमकर सराहना की और उनके सफर का हिस्सा बनने पर गर्व जताया।
बचपन से ही दिखाया था कमाल
चेन्नई में जन्मी वैशाली रमेशबाबू ने महज 6 साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। कम उम्र में ही उन्होंने अंडर-12 और अंडर-14 कैटेगरी में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। साल 2021 में वह इंटरनेशनल मास्टर बनीं और 2023 में ग्रैंडमास्टर बनने की सभी शर्तें पूरी कर लीं। उनके इस सफर में लगातार मेहनत और अनुशासन का बड़ा योगदान रहा है।
भाई के साथ बनाई अनोखी पहचान
वैशाली रमेशबाबू की पहचान सिर्फ उनकी उपलब्धियों से ही नहीं, बल्कि उनके परिवार से भी जुड़ी है। वह मशहूर ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंद रमेशबाबू की बड़ी बहन हैं। 2024 में यह भाई-बहन की जोड़ी एक साथ ग्रैंडमास्टर बनने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनी थी, जिसने शतरंज की दुनिया में नया इतिहास रचा।
अब वर्ल्ड चैंपियनशिप पर नजरें
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने के बाद अब सभी की नजरें वैशाली रमेशबाबू के अगले बड़े मुकाबले पर टिकी हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनका सामना अनुभवी खिलाड़ी जू वेनजुन से होगा। यह मुकाबला उनके करियर का सबसे बड़ा चैलेंज साबित हो सकता है। लेकिन जिस तरह से उन्होंने अब तक प्रदर्शन किया है, उससे उम्मीद है कि वह भारत को एक और ऐतिहासिक जीत दिला सकती हैं।
