महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, ‘विरोध करने वालों को महिलाएं माफ नहीं करेंगी’, काला नजर पर कही ये बात !
नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक पर बोलते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में जब-जब महिला आरक्षण का विरोध हुआ है, तब-तब महिलाओं ने ऐसे दलों और नेताओं को सख्त जवाब दिया है। पीएम ने साफ कहा कि इस बार सभी दलों की सहमति से विधेयक पारित हुआ है, इसलिए किसी को राजनीतिक नुकसान या फायदा नहीं हुआ। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया और कहा कि यह फैसला 25-30 साल पहले ही हो जाना चाहिए था।
विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक प्रगति या इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें महिलाओं की बराबर भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की 50 फीसदी आबादी को नीति निर्धारण में शामिल करना समय की मांग है। पीएम मोदी के अनुसार, भारत 21वीं सदी में नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और इस दौर में महिलाओं को पीछे रखना सही नहीं होगा।
खुद को बताया अति पिछड़े समाज से
अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि वह अति पिछड़े समाज से आते हैं और यह संविधान की ताकत है कि ऐसे समाज के व्यक्ति को देश का नेतृत्व करने का मौका मिला। उन्होंने संविधान निर्माताओं के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी है।
‘नारी शक्ति को उसका हक दे रहे हैं’
पीएम मोदी ने कहा कि यह विधेयक किसी पर एहसान नहीं, बल्कि महिलाओं का अधिकार है। उन्होंने कहा कि दशकों तक महिलाओं को उनका हक नहीं मिला, और अब समय आ गया है कि इस गलती को सुधारा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नारी शक्ति केवल निर्णय ही नहीं, बल्कि नेताओं की नीयत भी देखेगी और अगर नीयत में खोट होगी तो उसे माफ नहीं करेगी।
विपक्ष को दिया खुला ऑफर
प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कोई इस विधेयक का विरोध करेगा तो राजनीतिक लाभ उन्हें मिलेगा, लेकिन वह इसके लिए क्रेडिट लेने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने विपक्ष को खुला ऑफर देते हुए कहा कि वे चाहें तो पूरा श्रेय ले सकते हैं, उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। पीएम ने इसे ‘क्रेडिट का ब्लैंक चेक’ बताते हुए कहा कि उनका मकसद सिर्फ महिलाओं को उनका हक दिलाना है।
सर्वसम्मति से पास करने की अपील
पीएम मोदी ने सभी दलों से अपील की कि इस विधेयक को राजनीति से ऊपर उठकर देखें और सर्वसम्मति से पास करें। उन्होंने कहा कि सामूहिक निर्णय से ही बेहतर परिणाम मिलते हैं और देश को नई दिशा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने देश में नई राजनीतिक चेतना पैदा की है, जिसे अब संसद तक मजबूत करना जरूरी है।
