ईरान में इस साल सरकार विरोध प्रदर्शनों के बाद सख्त कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में बीता हेममती नाम की महिला को फांसी देने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि वह जनवरी में हुए एंटी-रिजीम प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण मौत की सजा पाने वाली पहली चर्चित महिला प्रदर्शनकारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन प्रदर्शनों के बाद अब तक लगभग 1600 लोगों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, जिससे देश में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है।
क्या हैं बीता हेममती पर आरोप
बीता हेममती पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें हथियार और विस्फोटक का इस्तेमाल, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और राष्ट्रीय सुरक्षा में बाधा डालना शामिल है। नेशनल काउंसिल ऑफ रेसिस्टेंस की रिपोर्ट के अनुसार, उन पर विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप भी है। उनके पति मोहम्मदरेजा मजीद असल और दो अन्य लोगों को भी इसी मामले में दोषी ठहराया गया है और उन्हें भी मौत की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा एक रिश्तेदार को छह साल की जेल की सजा दी गई है।
प्रदर्शनों के बाद बढ़ी सख्ती
जनवरी में ईरान के कई शहरों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें सरकार ने बलपूर्वक दबा दिया। इसके बाद हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया और तेजी से मुकदमे चलाए गए। इसी के चलते मौत की सजा पाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इन कार्रवाइयों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है और कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे कड़ा कदम बताया है।
फांसी के मामलों में लगातार इजाफा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में फांसी के मामलों में पिछले कुछ समय में तेजी आई है। अनुमान है कि 2025 में 1400 से ज्यादा लोगों को फांसी दी जा सकती है, जिनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जो सरकार विरोध प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं। यह कार्रवाई सरकार की उस रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके जरिए विरोध को दबाने और नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
महिलाओं पर भी बढ़ा असर
ईरान में महिलाओं पर भी इन सख्त कदमों का असर साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 2010 से 2024 के बीच 125 महिलाओं को फांसी दी जा चुकी है। अब बीता हेममती का मामला सामने आने के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इस तरह की सजाएं लोगों में डर पैदा करने के लिए दी जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दुनिया भर में चिंता जताई जा रही है। कई संगठनों ने ईरान सरकार से सख्ती कम करने और निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया अपनाने की मांग की है। वहीं, यह मामला अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले समय में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
