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बस अग्निकांड में लापरवाही पर कार्रवाई, जैसलमेर के दो अधिकारी निलंबित

बस अग्निकांड में लापरवाही पर कार्रवाई, जैसलमेर के दो अधिकारी निलंबित

राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर मंगलवार को हुई बस अग्निकांड की घटना ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है। एक निजी एसी स्लीपर बस में अचानक लगी आग ने 20 यात्रियों की जिंदगी छीन ली, जबकि 16 अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। इस हृदयविदारक हादसे के बाद बुधवार को राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए चित्तौड़गढ़ के दो परिवहन अधिकारियों को निलंबित कर दिया। जांच में पता चला कि हादसे का शिकार हुई बस नॉन-एसी के रूप में रजिस्टर्ड थी, लेकिन बाद में अवैध रूप से एसी में मॉडिफाई की गई थी।

मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे जैसलमेर से जोधपुर की ओर जा रही इस प्राइवेट स्लीपर बस में करीब 57 यात्री सवार थे। बस थईयात गांव के पास वार म्यूजियम के निकट पहुंची ही थी कि उसके पिछले हिस्से से धुआं उठने लगा। चालक ने तुरंत वाहन रोका, लेकिन तब तक आग ने पूरे बस को लपेट लिया। स्थानीय लोगों के अनुसार, बस आग की लपटों में 50 मीटर तक दौड़ती रही, जिससे यात्रियों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।

आंखों देखी घटना बताते हुए एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "बस अचानक आग का गोला बन गई। यात्रियों की चीखें सुनाई दे रही थीं, लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई मदद नहीं कर पाया। कई लोग खिड़कियों से कूदने की कोशिश में भी झुलस गए।" हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों समेत कई लोग शिकार हुए, जिनमें प्री-वेडिंग शूट से लौट रहा एक कपल भी शामिल था। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी थे, जो इस घटना को और भी दर्दनाक बना देते हैं।

जैसलमेर के कलेक्टर प्रताप सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा, "चार घंटे बाद भी बस की बॉडी इतनी गर्म थी कि शवों को निकालना मुश्किल हो रहा था। हम डीएनए सैंपल के जरिए 20 मृतकों की पहचान कर रहे हैं।" घायलों को पहले जैसलमेर के जवाहर अस्पताल ले जाया गया, जहां से 16 गंभीर मरीजों को जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया। इनमें से ज्यादातर 50-70 प्रतिशत तक झुलसे हुए हैं, और उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।

कैसे हुआ हादसा?

प्रारंभिक जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में एसी के कम्प्रेशर पाइप फटने की बात सामने आई है। एक स्थानीय निवासी ने संदेह जताया कि बस में पटाखों की वजह से भी स्पार्क हो सकता है। हालांकि, मुख्य खुलासा तब हुआ जब पता चला कि बस की बॉडी चित्तौड़गढ़ के परिवहन विभाग से नॉन-एसी के रूप में अप्रूव हुई थी। बस 21 मई 2025 को बिल हुई थी और तीन महीने में ही एसी में परिवर्तित कर दी गई। इस लापरवाही के चलते बुधवार को चित्तौड़गढ़ के कार्यवाहक डीटीओ और सहायक प्रशासनिक अधिकारी को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया।

जिला परिवहन अधिकारी नीरज शाह ने पुष्टि की, "बस की रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी पाई गई है। हम पूरी जांच कर रहे हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।" मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने देर रात जोधपुर अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और आश्वासन दिया कि सभी को उचित इलाज मुहैया कराया जाएगा।

नेताओं ने जताया शोक, मुआवजे का ऐलान

इस दुखद घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, "जैसलमेर में बस अग्निकांड अत्यंत पीड़ादायक है। शोकाकुल परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी व्यथित होते हुए कहा, "इस हादसे से व्यथित हूं। पीड़ित परिवारों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।" राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि घोषित की है।

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, "यह एक दुखद क्षण है। हम दोषियों को बख्शेंगे नहीं। परिवहन विभाग में सुरक्षा मानकों को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं।" विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।

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