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आंध्र प्रदेश में दर्दनाक हादसा: चलती बस में लगी आग, 20 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत

आंध्र प्रदेश में दर्दनाक हादसा: चलती बस में लगी आग, 20 यात्रियों की जिंदा जलकर मौत

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही एक प्राइवेट बस एक मोटरसाइकिल से टकराने के बाद धू-धू से जल उठी। इस भयावह अग्निकांड में कम से कम 20 यात्री जिंदा जल गए, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। यात्रियों में अधिकांश सो रहे थे, जिस कारण आग की लपटों ने कुछ ही मिनटों में पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना कुरनूल जिले के कल्लूर मंडल के चिन्नाटेकुर गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई, जहां सड़क पर अंधेरा और तेज रफ्तार ने मौत को आमंत्रित कर दिया।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कावेरी ट्रैवल्स की इस बस में करीब 42 यात्री सवार थे, जो रात के करीब 12 बजे हैदराबाद से बेंगलुरु के लिए रवाना हुई थी। सुबह के लगभग 2:30 बजे, जब बस चिन्नाटेकुर के पास पहुंची, तभी सामने से आ रही एक मोटरसाइकिल से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और ईंधन टैंक से पेट्रोल लीक हो गया। चिंगारी लगते ही आग की लपटें भड़क उठीं, जो कुछ ही पलों में पूरी बस में फैल गईं। यात्रियों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें रात की खामोशी को चीरती रहीं, लेकिन दरवाजे जाम होने और खिड़कियां टूटने के कारण अधिकांश बाहर नहीं निकल पाए।

हादसे के एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी, मोटरसाइकिल सवार राम राव (नाम परिवर्तित), ने बताया, "मैं बेंगलुरु से कुरनूल लौट रहा था। अचानक बस तेज गति से आई और मेरी बाइक को चपेट में ले लिया। मैं किसी तरह कूदकर बच गया, लेकिन बस में आग लगते ही सब कुछ नर्क जैसा हो गया। मैंने यात्रियों को चिल्लाते सुना, लेकिन मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा।" राम राव खुद मामूली चोटों से बच गए, लेकिन उनकी बाइक पूरी तरह जलकर राख हो गई।

बच निकले यात्रियों में से एक, 28 वर्षीय आईटी इंजीनियर प्रिया शर्मा, ने अस्पताल से बातचीत में कहा, "हम सब सो रहे थे। अचानक जोरदार धमाका हुआ और धुआं भर गया। मैंने खिड़की तोड़ी और कूद पड़ी, लेकिन मेरी बहन अंदर ही फंस गई। वह जिंदा जल गई।" प्रिया की आंखों में आंसू थे और हाथों पर जलन के निशान साफ दिख रहे थे। इसी तरह, एक बुजुर्ग यात्री ने बताया कि बस में कोई फायर एक्सटिंग्विशर नहीं था, न ही इमरजेंसी एग्जिट साफ-सुथरा था। "ड्राइवर ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन देर हो चुकी थी।"

मौत का आंकड़ा और घायलों की हालत

प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 शवों को बस से बाहर निकाला गया है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि के बाद संख्या 25 तक पहुंच सकती है। अधिकांश शव इतने झुलसे हुए हैं कि पहचान मुश्किल हो रही है। डीएनए टेस्ट के जरिए ही परिजनों को शव सौंपे जाएंगे। कुरनूल के सरकारी अस्पताल में 15 से अधिक घायल भर्ती हैं, जिनमें से चार की हालत नाजुक है। डॉक्टरों का कहना है कि सांस लेने में दिक्कत और गंभीर जलन के कारण कईयों को वेंटिलेटर पर रखा गया है।

राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हादसे की सूचना मिलते ही तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जिला कलेक्टर को मौके पर पहुंचने और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा, "यह एक दुखद घटना है। हम पूरी जांच करवाएंगे और दोषियों को सजा दिलाएंगे। प्रत्येक मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।" नायडू ने कुरनूल के अस्पताल का दौरा भी किया, जहां उन्होंने घायलों से मुलाकात की और डॉक्टरों को बेहतर इलाज का आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर शोक व्यक्त किया और केंद्र सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की। उन्होंने ट्वीट किया, "आंध्र प्रदेश के इस दुखद हादसे से पूरा देश स्तब्ध है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिवारों के साथ हैं।"

क्या थी हादसे की वजह?

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बस की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक थी, जबकि राजमार्ग पर रात्रि में 60 किमी/घंटा की सीमा है। मोटरसाइकिल सवार बिना हेलमेट और बिना लाइट के सड़क पर था, जो टक्कर का प्रमुख कारण बना। लेकिन सबसे बड़ी लापरवाही बस के ईंधन सिस्टम की बताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुरानी बसों में पेट्रोल लीक की समस्या आम है, खासकर प्राइवेट ऑपरेटरों की। एक ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "कावेरी ट्रैवल्स जैसी कंपनियां नियमित मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं देतीं। फिटनेस सर्टिफिकेट भी पुराने हो सकते हैं।"

आंध्र प्रदेश ट्रांसपोर्ट विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में प्राइवेट बसों की संख्या 5,000 से अधिक है, लेकिन केवल 60 प्रतिशत ही नियमित जांच से गुजरती हैं। "इस हादसे के बाद हम सख्ती बरतेंगे। सभी बसों का स्पेशल ऑडिट होगा।" पिछले साल आंध्र में इसी तरह के तीन हादसों में 15 लोग मारे गए थे, जो सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं।

परिजनों का गुस्सा और मांगें

मृतकों के परिजन अस्पताल के बाहर जमा हो गए हैं। एक मां ने रोते हुए कहा, "मेरा बेटा नौकरी के सिलसिले में बेंगलुरु जा रहा था। अब कौन जिम्मेदार है?" परिवारों ने प्राइवेट बस ऑपरेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मुआवजे की मांग की है। टीडीपी सांसद बायरेड्डी शबारि ने कहा, "मौत का आंकड़ा 25 तक पहुंच सकता है। सरकार को तत्काल राहत पहुंचानी चाहिए।"

स्थानीय लोगों ने सड़क पर कैंडल मार्च निकाला, जिसमें 'सुरक्षित यात्रा का अधिकार' के नारे लगाए गए। एनजीओ 'रोड सेफ्टी फाउंडेशन' ने बयान जारी कर कहा कि राजमार्ग पर स्पीड ब्रेकर और बेहतर लाइटिंग की जरूरत है।

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