मानसून की विदाई के बाद भी भारत का मौसम सुस्त पड़ने को तैयार नहीं है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, देश में एक साथ तीन प्रमुख मौसमी सिस्टम सक्रिय हो चुके हैं, जिनका असर मध्य प्रदेश से लेकर दक्षिणी तटों तक फैल चुका है। इन सिस्टमों के कारण अगले चार दिनों तक 15 राज्यों में तेज हवाओं, भारी बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है।
खासकर बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा चक्रवात 'मोंथा' 28 अक्टूबर की शाम या रात को आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा तट से टकराने की कगार पर है, जिससे ओडिशा और आंध्र में रेड अलर्ट घोषित हो चुका है। गुजरात में अरब सागर के डिप्रेशन ने 24 घंटों में 8 इंच बारिश बरसा दी है, जबकि उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ठंड की दस्तक दे रहा है।
यह असामान्य मौसमी घटना मानसून के अवशेषों और वैश्विक मौसम पैटर्न के संयोजन का नतीजा है। 15 अक्टूबर को मानसून की आधिकारिक विदाई के बावजूद, इन सिस्टमों ने देश के 90 प्रतिशत हिस्सों में बादल छा दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे एक साथ सक्रिय सिस्टम अब अधिक आम हो रहे हैं, जो बाढ़, जलभराव और कृषि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आइए, इन तीन सिस्टमों की विस्तृत जानकारी समझते हैं।
चक्रवात 'मोंथा'
देश के पूर्वी तट पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है। दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र तेजी से गंभीर समुद्री तूफान 'मोंथा' में बदल रहा है। इसका केंद्र विशाखापट्टनम से लगभग 830 किलोमीटर पूर्व में स्थित है और हवा की गति 100-110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच चुकी है। आईएमडी के अनुसार, यह सिस्टम 28 अक्टूबर की शाम को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम और कलिंगापट्टनम के बीच काकीनाड़ा के पास तट से टकराएगा।
इसका असर आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे 12 राज्यों में दिखेगा। ओडिशा के 15 जिलों में विशेष रूप से प्रभावित होने की आशंका है, जहां 8 जिलों—मलकानगिरी, कोरापुट, नबरंगपुर, रायगड़ा, गजपति, गंजाम, कंधमाल और कालाहांडी—में रेड अलर्ट जारी है। यहां तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। आंध्र प्रदेश में सोमवार को स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जबकि ओडिशा में आंगनवाड़ी केंद्र और स्कूल 30 अक्टूबर तक बंद रहेंगे।
ओडिशा सरकार ने व्यापक तैयारी की है। राज्य में 24 ओड्राफ (ODRAF) टीमें, 5 एनडीआरएफ दस्ते, 99 फायर सर्विस टीमें और 128 डिजास्टर एक्शन टीमों के 5,000 से अधिक कर्मचारी तैनात किए गए हैं। पुरी बीच पर पर्यटकों को समुद्र से दूर रहने की सलाह दी गई है, और मछुआरों को 29 अक्टूबर तक समुद्र में न जाने की हिदायत है। तमिलनाडु और केरल में भी ऑरेंज अलर्ट है, जहां अगले 48 घंटों में 10-15 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह चक्रवात मानसून के बाद का सबसे शक्तिशाली तूफान साबित हो सकता है, जिससे दक्षिण भारत में फसलें—खासकर धान और सब्जियां—को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
अरब सागर का डिप्रेशन
पश्चिमी तट पर पूर्व-मध्य अरब सागर में बना डिप्रेशन गुजरात के तटीय जिलों को भिगो रहा है। यह सिस्टम अब तट से दूर जा रहा है, लेकिन इसका असर भावनगर के महुवा जैसे इलाकों में स्पष्ट है, जहां 24 घंटों में 8 इंच (लगभग 20 सेंटीमीटर) बारिश हो चुकी है। गुजरात के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी है, और अगले 24 घंटों में और भारी वर्षा की चेतावनी है।
इस सिस्टम का प्रभाव गुजरात के अलावा राजस्थान के कोटा और उदयपुर संभागों तक फैल रहा है। राजस्थान के 23 जिलों में अलर्ट है, जिसमें 6 जिलों में ऑरेंज और 17 में येलो अलर्ट शामिल है। यहां सोमवार को तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी जारी रहेगी। मध्य प्रदेश के 20 जिलों में भी इस सिस्टम का असर दिखा, जहां श्योपुर में 9 घंटों में 2 इंच बारिश दर्ज हुई। उज्जैन, ग्वालियर-चंबल और भोपाल-इंदौर संभागों में हल्की बूंदाबांदी ने किसानों को राहत दी, लेकिन जलभराव की समस्या बढ़ा दी है।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस
उत्तर-पश्चिमी दिशा से आ रहा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस पहाड़ी राज्यों को निशाना बना रहा है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सोमवार से इसकी दस्तक होगी, जहां बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है। नवंबर के पहले हफ्ते में तापमान 3-4 डिग्री सेल्सियस गिर सकता है, और 6 नवंबर के बाद दूसरी सबसे भारी बर्फबारी हो सकती है।
इसका असर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक पहुंचेगा। दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को काबू करने के लिए सड़कों पर पानी छिड़का जा रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश के 18 जिलों—कानपुर से जालौन तक—में 27 से 29 अक्टूबर तक भारी बारिश का अलर्ट है। लखनऊ में अधिकतम तापमान 33 डिग्री से गिरकर 21 डिग्री तक पहुंच सकता है, और न्यूनतम में 2-3 डिग्री की कमी आएगी। मेरठ में पहले ही न्यूनतम 16 डिग्री दर्ज हो चुका है, जो सर्दी की शुरुआत का संकेत है। 48 घंटों में धुंध और कोहरा छा सकता है, जिससे यातायात प्रभावित होगा।
सरकार की सलाह, सतर्क रहें
इन सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से देशभर में बाढ़, भूस्खलन और सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। आईएमडी ने मछुआरों को समुद्र से दूर रहने, किसानों को फसलें सुरक्षित रखने और आम जनता को बिजली गिरने से बचाव की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में जलभराव से निपटने के लिए ड्रेनेज सिस्टम चेक किए जा रहे हैं, जबकि ओडिशा और आंध्र में रिलीफ कैंप तैयार हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सिस्टम जलवायु परिवर्तन का परिणाम हैं, जो मानसून के बाद भी वर्षा को अनियमित बना रहे हैं। हालांकि, यह किसानों के लिए देर से आई राहत भी है, लेकिन बाढ़ से नुकसान की भरपाई चुनौतीपूर्ण होगी। अगले चार दिनों तक मौसम पर नजर रखें—बारिश तो राहत देगी, लेकिन सतर्कता ही सुरक्षा है।



