देश की सरहद से दिल को झकझोरने वाली मोहब्बत की एक ऐसी कहानी आयी है जिसे जो भी पढ़ेगा-सुनेगा उसकी आखें नम हो जाएंगी। सरहद पार की इस मोहब्बत ने भारत की जमीं पर प्यास से दम तोड़ा, दिल दहलाने वाली यह खबर राजस्थान के जैसलमेर से आयी, जहां पाकिस्तान से दाखिल हुए युवा जोड़े ने भारत की सीमा के 12 किमी अंदर रेगिस्तान में तपती रेत में प्यास से दम तोड़ दिया।
सुनसान रेगिस्तान में झुलसी मिली लाशें
जैसलमेर बार्डर से 50 किमी दूर पाकिस्तान के सिंध जिले के घोटकी गांव का रहने वाला 18 साल के रवि कुमार अपनी पत्नी 15 साल की शांति को दिया वायदा पूरा करने के लिए उसको लेकर 21 जून को घर (पाकिस्तान) से निकला था और 28 जून को तपती रेत में दोनों की लाशें मिलीं। एक चरवाहे ने सुनसान रेगिस्तान में दो लाशें देखीं तो गांव वालों को खबर की, गांव वालों ने पुलिस को बताया। पुलिस मौके पर पहुंची तो दिल दहलाने वाला दृश्य समने था। दोनों लाशों के बीच पड़ा खाली जरीकेन यह बता रहा था कि जब उसका एक-एक बूंद पानी खत्म हो गया तो दोनों ने प्यास से तड़पकर दम तोड़ दिया। मामला सरहद के पास का था इसलिए पुलिस ने बीएसएफ को भी खबर दी।

पिता का मिला पहला नंबर
दोनों की तलाशी में एक मोबाइल फोन मिला जिसमें पाकिस्तान का सिम था, पास से दोनों की पाकिस्तानी आईडी मिली जिससे पुलिस को रवि कुमार और शांति बाई के नाम और उनकी उम्र पता चली। अब पुलिस ने पहचान के लिए उनके फोन में मिले नंबरों पर बात शुरू की, पहला नंबर मिला रवि के पिता का..उन्होंने मोहब्बत की जो कहानी बयां की वर्दी वाले भी सिसकने लगे।
दोनों करते थे बेइंतहा मोहब्बत
पिता ने बताया कि रवि और शांति एक-दूसरे को बेइंतहा मोहब्बत करते थे, उनकी शादी दोनों परिवारों की मर्जी से फरवरी में हुई थी। उनके कुछ रिश्तेदार जैसलमेर और आसपास रहते हैं जो देश के बंटवारे के समय भारत चले गए थे, लेकिन वह खुद पाकिस्तान में ही रह गए। शादी के बाद शांति ने रवि से एक बार अपने रिश्तेदारों से मिलने और भारत देखने की इच्छा जाहिर की थी। इस पर रवि ने वायदा किया वह शांति को भारत लेकर जरूर जाएगा।

युद्ध में भी नहीं हारी मोहब्बत
अपना वायदा पूरा करने के लिए रवि कानूनी खानापूरी में जुट गया। मार्च में रवि ने वीजा अप्लाई किया, वीजा मिल पाता उससे पहले पहलगाम में आतंकियों ने बेरहमी से कई मोहब्बतों का कत्ल कर दिया। 27 लोगों को उनकी पत्नियों के सामने गोलियों से भून दिया। इसके बाद भारत की तरफ से शुरू हुआ आपरेशन सिंदूर और फिर दोनों तरफ से युद्ध लेकिन इस मोहब्बत युद्ध को भी मात देने की ठानी।
वीजा रुका तो सरदह लांघने की ठान ली
आपरेशन सिंदूर के बीच सभी पाकिस्तानियों को भारत छोड़कर जाने का आदेश हुआ, साथ ही पाकिस्तानियों का वीजा बंद कर दिया गया। अब रवि और शांति का वीजा भी फंस गया, शांति ने रवि से कहा उसका दिल टूट गया, उसका भारत जाने का सपना अब पूरा नहीं होगा. इश पर रवि ने कहा वह अपना वायदा हरहाल पूरा करेगा और उसे भारत लेकर जाएगा। इसके बाद रवि भारत जाने के दूसरे रास्ते तलाशने लगा।

तपता रेगिस्तान पार करने की जिद
रवि को पता चला कि पाकिस्तानी रेंजर और भारत की बीएसएफ की नजरों से बचकर सरहद में लगे तारों के नीचे से वह भारत में दाखिल हो सकता है। उसने यह भी पता कर लिया कि रेगिस्तान में मात्र 15-20 किमी पैदल चलकर वह किसी बस्ती तक पहुंच जाएगा और फिर वहां से सवारी से रिश्तेदारों के यहां। अब उसने इसकी तैयारी शुरू कर दी।
पिता के झगड़कर सरहद पार के लिए निकल पड़े
रवि के पिता के अनुसार 21 जून को रवि ने उनको बताया वह भारत जा रहा है, वीजा के बारे में पूछने पर उसने बताया कैसे-कैसे भारत पहुंचने का प्लान बनाया है। पिता ने गैरकानूनी तरीके से सरहद पार कर भारत जाने से मना किया तो उसने कहा शांति की इच्छा पूरी करने के लिए वह कुछ भी कर सकता है। इस बात पर पिता से उसने झगड़ा किया और शांति को बाइक से लेकर सरहद के लिए निकल पड़ा। उसने एक बैग में दोनों के कपड़े रखे थे, एक मोबाइल और भारतीय मुद्रा साथ में रखी थी। गांव से सरहद की दूरी करीब 50 किमी थी। पहले दोनों 30 किमी पर बीच में पड़ने वाली नूर फकीर दरगाह में हाजिरी लगाई और सलामत भारत पहुंचने के लिए मन्नत मांगी।

प्यास बुझाने को भरे थे दो जरीकेन
दरगाह से निकलकर बाइक से दोनों पाकिस्तान की उस बस्ती में पहुंचे जो सरहद के एकदम करीब थी, यहां रवि ने बाइक खड़ी कर दी। उनको रेत में पैदल चलना था इसलिए कपड़ों का बैग भी वहीं छोड़ दिया। जून के महीने में तपते रेगिस्तान में प्यास बुझाने के लिए उन्होंने 5-5 लीटर के दो जरीकेन खरीदे उनमें पानी भरा और निकल पड़े सरहद पार के लिए।
सुरक्षाबलों की आंख बचा सरहद पार की
दोनों देशों के सुरक्षा बलों की नजर बचाकर वह भारत की सीमा में दाखिल हो गए लेकिन खुदा को कुछ और मंजूर था। सरहद पार कर वह कुछ किमी चले इसके बाद रास्ता भटक गए, फिर भी वह आगे बढ़ते रहे। 21 को सरहद पार करने वाले रवि और शांति के शव सरहद से 12 किमी दूर भारत में साखेवाला गांव के पास मिले। उनके शवों के पास सूखा जरिकेन गवाही दे रहा था कि वह किस तरह-तरह एक बूंद पानी के लिए तड़पकर मरे होंगे। उनके पास एक-दो लीटर पानी और होता तो शायद वह बस्ती तक पहुंच जाते और दोनों की जान बच जाती।

पोस्टमार्टम रिपोर्टः प्यासे मर गए दोनों
पुलिस के फोन पर भीलवाड़ा से उनके रिश्तेदार पहुंचे जिनकी मौजूदगी में उनका पोस्टमार्टम कराया गया। दोनों के शव कई दिन तक तपते रेत में पड़े रहने के कारण काले पड़ गए थे। पोस्टमार्टम में झकझोरने वाली रिपोर्ट सामने आयी, डॉक्टरों ने बताया दोनों की मौत प्यास से हुई है, यानी दोनों प्यासे मर गए। यानी सरहद पार की मोहब्बत.. सरहद पार कर प्यासी दम तोड़ गई। भीलवाड़ा में रिश्तेदारों ने उनका अंतिम संस्कार किया लेकिन वीजा की रोक के कारण दोनों के मां-बाप और परिवार के लोग नहीं आ पाए।

इंतजार गवारा नहीं था
यह सही है दोनों का सरहद पार कर आने का तरीका गलत था, अवैध रूप से सरहद पार कर उन्होंने जुर्म किया था। वह थोड़ा रुक जाते तो शायद वीजा मिल जाता लेकिन रवि को अपने प्यार को दिया गया वायदा निभाने की जल्दी थी। पहलगाम आतंकियों ने 27 नहीं यह दो कत्ल भी किए..इस मोहब्बत को गोलियों से नहीं रेगिस्तान में तड़पाकर मारा।



