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‘दो पीढ़ियों की तबाही का जिम्मेदार NDA’—तेजस्वी यादव ने साधा निशाना

‘दो पीढ़ियों की तबाही का जिम्मेदार NDA’—तेजस्वी यादव ने साधा निशाना

बिहार विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजते ही विपक्षी दलों ने सत्ताधारी एनडीए पर हमला बोल दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और महागठबंधन के संभावित मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी प्रसाद यादव ने सोमवार को पटना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "एनडीए सरकार ने बिहार की दो पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया है। 20 सालों में नौजवानों को नौकरी नहीं, महिलाओं को सुरक्षा नहीं, और किसानों को राहत नहीं मिली। अब समय आ गया है कि हम 20 महीनों में बिहार को नया रूप दें।" इस बयान ने सियासी हलकों में हंगामा मचा दिया है, और एनडीए नेताओं ने इसे 'झूठी प्रचार' बताते हुए पलटवार किया है।

तेजस्वी का यह बयान बिहार चुनाव 2025 के संदर्भ में आया है, जहां छठ पूजा के बाद प्रचार अभियान में तेजी आने वाली है। प्रियंका गांधी वाड्रा मंगलवार से अपने प्रचार की शुरुआत कर रही हैं, जबकि राहुल गांधी भी जल्द बिहार पहुंचने वाले हैं। तेजस्वी ने कहा कि एनडीए की नीतियों ने बिहार को सबसे गरीब राज्य बना दिया है। "बिहार में 40 प्रतिशत से अधिक आबादी गरीबी रेखा से नीचे जी रही है। बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत के पार है, और हर साल लाखों नौजवान पलायन को मजबूर हो रहे हैं। यह दो पीढ़ियों का नुकसान है – एक तो जो नौकरी के लिए दिल्ली-मुंबई भटक रही है, और दूसरी जो बचपन से ही शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी झेल रही है।"

तेजस्वी ने अपनी बात को आंकड़ों से पुष्ट किया। राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग (एनएसएसओ) के अनुसार, बिहार में युवा बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। 2024 की सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) रिपोर्ट में भी बिहार को सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शुमार किया गया। उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने 20 सालों में बिहार को 'जंगल राज' से 'भ्रष्टाचार राज' में बदल दिया। अपराध की दर बढ़ी, भ्रष्टाचार चरम पर पहुंचा, और शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई। पटना यूनिवर्सिटी जैसी संस्थाएं आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझ रही हैं।"

यह बयान सितंबर 2025 में तेजस्वी द्वारा उठाए गए 10 सवालों का विस्तार है, जहां उन्होंने एनडीए से गरीबी, महिला असुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा पर जवाब मांगा था। उस समय भी उन्होंने कहा था, "दो पीढ़ियों का जीवन बर्बाद करने वाली 20 वर्षों की नीतीश-मोदी और 11 वर्षों की डबल इंजन सरकार का हिसाब चुकाना होगा।" अब चुनावी मोड में आते हुए तेजस्वी ने इसे और तीखा बना दिया। जनसभा में उन्होंने वादा किया, "अगर महागठबंधन सत्ता में आया, तो 10 लाख नौकरियां देंगे, महिलाओं को मासिक 1000 रुपये की सहायता, और हर जिले में मेडिकल कॉलेज। बिहार को पलायन मुक्त बनाएंगे।"

एनडीए ने तेजस्वी के बयान पर तीखा प्रतिक्रिया दी। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा, "तेजस्वी जी खुद 2015-2020 तक सरकार में थे, तब क्या किया? एनडीए ने बिहार को सड़क, बिजली और पानी दिया। बेरोजगारी पर हमारी योजनाएं चल रही हैं – आईटीआई, स्किल सेंटर और स्टार्टअप इंडिया। यह महज चुनावी ड्रामा है।" जीतन राम मांझी ने तो तेजस्वी के एक पोस्टर पर ही भड़क गए, जिसमें उन्हें 'हीरो' बताया गया था। मांझी ने कहा, "एक बेकार व्यक्ति को हीरो कहना शब्द का अपमान है। एनडीए ने दलित-महादलितों को सशक्त किया, विपक्ष बस झूठ फैला रहा है।"

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बिहार की सियासत में यह बयान एक नया मोड़ ला सकता है। 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए (बीजेपी-जेडीयू गठबंधन) को 130 से अधिक सीटों का लक्ष्य है, जबकि महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वामपंथी) 120 का। 2015 में महागठबंधन ने बहुमत हासिल किया था, लेकिन 2020 में एनडीए ने पलटवार किया। इस बार मुद्दे स्पष्ट हैं – विकास बनाम सामाजिक न्याय। तेजस्वी का फोकस युवाओं और महिलाओं पर है, जो बिहार की 60 प्रतिशत आबादी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पलायन और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को हवा देगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों में गूंजेंगे।

बिहार का पलायन एक पुरानी बीमारी है। हर साल 20 लाख से अधिक बिहारी मजदूर दूसरे राज्यों में जाते हैं। 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बाद बिहार से सबसे ज्यादा पलायन होता है। तेजस्वी ने इसे 'एनडीए का काला अध्याय' बताया। उन्होंने कहा, "दिल्ली की सड़कों पर बिहारी मजदूर मर रहे हैं, क्योंकि यहां नौकरी नहीं। हमारा 'नौकरी देंगे' वादा पूरा होगा।" इसके अलावा, महिला सुरक्षा पर भी उन्होंने निशाना साधा। बिहार में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से 20 प्रतिशत ऊपर है, और बलात्कार के मामले बढ़े हैं।

महागठबंधन की रणनीति साफ है – तेजस्वी को युवा चेहरा बनाकर। उनके इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, "बिहार में बदलाव निश्चित है। एनडीए का 20 वर्षों का अंधकार युग खत्म होने वाला है।" वहीं, एनडीए सीमांचल जैसे क्षेत्रों में वक्फ कानून और धार्मिक मुद्दों पर वोट बांटने की कोशिश कर रहा है। तेजस्वी ने रविवार को कटिहार में कहा, "सरकार बनते ही वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे।"

चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार चुनाव नवंबर-दिसंबर में हो सकते हैं। छठ के बाद प्रचार चरम पर पहुंचेगा। तेजस्वी का यह बयान न केवल एनडीए को चुनौती है, बल्कि बिहार की जनता को आईना दिखाने की कोशिश भी। क्या दो पीढ़ियों का दर्द वोटों में बदल पाएगा? यह तो वक्त बताएगा, लेकिन सियासी तापमान तो चढ़ ही गया है।

बिहार चुनावी रणनीति तेज: प्रियंका 28 को, राहुल 29 अक्टूबर से रैलियां करेंगे

बिहार में 243 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में एनडीए (भाजपा, जेडीयू, हम, एलजेएपी आदि) और महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल) के बीच कांटे की टक्कर है। चुनाव आयोग ने 10 अक्टूबर को तारीखों का ऐलान किया था, जिसके बाद से सभी पार्टियां कमर कस रही हैं। पहले चरण की 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होगा, जबकि बाकी 122 सीटें 11 नवंबर को। नतीजे 16 नवंबर को आएंगे। इस चुनावी मौसम में चहत पूजा के ठीक बाद कैंपेनिंग तेज हो रही है, जो पार्टियों के लिए आखिरी मौका है।

प्रियंका और राहुल का 'वोट फॉर चेंज' कैंपेन

कांग्रेस ने बिहार में अपनी 'लास्ट माइल' कैंपेन को जोरदार बनाने का फैसला किया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में 'वोट फॉर चेंज' अभियान शुरू हो चुका है, जो नौकरियों, सामाजिक न्याय और भाजपा की 'विभाजनकारी' राजनीति पर केंद्रित है। प्रियंका गांधी 28 अक्टूबर को बिहार पहुंचेंगी और दो सार्वजनिक सभाओं को संबोधित करेंगी। सूत्रों के मुताबिक, वे महिलाओं और युवाओं को लक्षित कर रैलियों में उतरेंगी। कांग्रेस का दावा है कि प्रियंका की मौजूदगी से पार्टी को खासा फायदा होगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां महिलाओं का वोट बैंक मजबूत है।

राहुल गांधी 29 अक्टूबर से 'मिशन बिहार' की कमान संभालेंगे। वे 20 से अधिक रैलियों और रोड शो करेंगे, जो पूरे राज्य को कवर करेंगे। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, "राहुल जी छठ पूजा के बाद ही कैंपेनिंग में उतरेंगे, ताकि स्थानीय भावनाओं का सम्मान हो। उनका फोकस इंडिया गठबंधन को मजबूत करना और त्रिशूली यादव जैसे सहयोगियों के साथ एकजुटता दिखाना होगा।" यह कदम तब आया है जब पार्टी में राहुल की अनुपस्थिति को लेकर असंतोष की खबरें आ रही थीं। विपक्षी दलों ने इसे 'गणना की रणनीति' बताकर सवाल उठाए थे।

कांग्रेस ने बिहार के लिए अपना घोषणा-पत्र भी जल्द जारी करने की योजना बनाई है, जिसमें महिलाओं को 2500 रुपये मासिक भत्ता, युवाओं के लिए रोजगार गारंटी और किसानों के लिए MSP जैसे वादे शामिल हैं। प्रियंका की पिछली यात्राओं में भी महिलाओं पर फोकस रहा था, जो पार्टी को ग्रामीण इलाकों में मजबूती दे रहा है।

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मनोज तिवारी का नीतीश समर्थन

दूसरी ओर, एनडीए ने अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए मनोज तिवारी ने कहा, "नीतीश ही एनडीए के सीएम फेस हैं।" दिल्ली से बिहार चुनावी दौरे पर पहुंचे तिवारी ने यह बयान चुनावी मंच पर दिया। उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार ने बिहार को पटरी पर उतारा है। महिलाओं को 10 हजार रुपये की सहायता, सड़कें, बिजली- पानी जैसी सुविधाएं उनके नेतृत्व में ही आईं। एनडीए की जीत के बाद वे ही सीएम बनेंगे।" यह बयान तब आया जब राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेएपी) के चिराग पासवान ने भी नीतीश को समर्थन देते हुए कहा कि बिहार आरजेडी को दोबारा मौका नहीं देगा।

तिवारी ने महागठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा, "वे मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक मानते हैं। वक्फ एक्ट को कूड़ेदान में फेंकने की बात करते हैं, लेकिन क्या वे बिहार के विकास की बात कर रहे हैं?" भाजपा सांसद ने त्रिशूली यादव के वक्फ एक्ट वाले बयान पर पलटवार किया, जो हाल ही में सरण में एक मेगा रैली में दिया गया था।

नीतीश कुमार का एनडीए सीएम फेस बनना कोई नई बात नहीं है। 2020 के चुनाव में भी वे चेहरा थे, और जेडीयू-भाजपा गठबंधन ने बहुमत हासिल किया था। लेकिन विपक्ष का दावा है कि भाजपा नीतीश को धोखा देगी। आरजेडी नेता त्रिशूली यादव ने कहा, "नीतीश दोबारा सीएम नहीं बनेंगे। भाजपा का एजेंडा अलग है।" फिर भी, एनडीए की सीट-बंटवारा पर सहमति बन चुकी है, जो उनकी ताकत दिखाती है।

मोदी-शाह की धमाकेदार एंट्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अक्टूबर को बिहार कैंपेन की शुरुआत दो रैलियों से की थी, जहां उन्होंने एनडीए की 'इतिहास रचने' वाली जीत का दावा किया। गृह मंत्री अमित शाह खगड़िया और मुंगेर में रैलियां कर चुके हैं। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे सहयोगी भी सक्रिय हैं। महागठबंधन की ओर से त्रिशूली यादव सरण में मेगा रैली कर रहे हैं, जबकि लालू प्रसाद यादव स्वास्थ्य कारणों से सीमित हैं।

कौन किस पर भारी?

2020 में एनडीए को 125 सीटें मिली थीं, जबकि महागठबंधन को 110। इस बार जातिगत समीकरण बदल रहे हैं। यादव-मुस्लिम वोट महागठबंधन के पक्ष में, लेकिन एक्स-बिहार के 'पलायन' और बेरोजगारी मुद्दे राहुल-प्रियंका के लिए हथियार हैं। एनडीए विकास और स्थिरता पर जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा वोट निर्णायक होंगे।

कांग्रेस की रैलियां एनडीए की एकजुटता को चुनौती देंगी, लेकिन तिवारी का बयान नीतीश समर्थकों को उत्साहित कर रहा है। बिहार की जनता अब फैसला लेगी कि 'चेंज' चाहिए या 'स्टेबिलिटी'। चुनावी जंग अब चरम पर है।

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