इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल से जुड़े ‘तेजो महालय’ दावे पर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा है। यह याचिका आगरा की निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती देती है, जिसमें ताजमहल का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग खारिज कर दी गई थी।
याचिका में क्या है दावा?
याचिकाकर्ता का दावा है कि ताजमहल वास्तव में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर ‘तेजो महालय’ है। याचिका में कहा गया है कि हिंदू श्रद्धालुओं को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत यहां पूजा और दर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए। साथ ही स्मारक की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निरीक्षण कराए जाने की मांग भी की गई है, ताकि दावों की जांच हो सके।
निचली अदालत के आदेश को चुनौती
आगरा की अदालत ने पहले सर्वे की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि याचिकाकर्ता आवश्यक राजस्व अभिलेख और भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। बाद में पुनरीक्षण याचिका भी खारिज हो गई। अब इन्हीं आदेशों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि स्मारक की वास्तविक संरचना और बंद हिस्सों की जांच के लिए अदालत की निगरानी में सर्वे जरूरी है।
मामला अभी विचाराधीन
हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने केवल केंद्र सरकार और ASI से जवाब तलब किया है। अब अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अपना पक्ष रखेंगे, जिसके बाद अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी। फिलहाल ताजमहल को लेकर उठे इस दावे पर कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही सामने आएगा।
