गर्मियों में धूप में खड़ी कार धीरे-धीरे एक बंद भट्टी में बदल जाती है, जो अंदर बैठे सामान के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। बाहर का तापमान भले ही 35 डिग्री के आसपास हो, लेकिन बंद गाड़ी के अंदर महज कुछ ही मिनटों में तापमान 50 से 60 डिग्री तक पहुंच जाता है। ऐसे में कार के भीतर रखी साधारण चीजें भी खतरनाक रूप ले सकती हैं। यह लापरवाही न केवल गाड़ी को नुकसान पहुंचा सकती है बल्कि बड़ी दुर्घटना का कारण भी बन सकती है।
पानी की बोतल से भी बढ़ सकता है जोखिम
आम तौर पर लोग पानी की बोतल को सुरक्षित मानते हैं, लेकिन गर्मी में यह भी खतरे की वजह बन सकती है। प्लास्टिक की बोतल में भरा पानी सूरज की किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित कर देता है, जिससे सीट या कपड़े पर गर्मी तेजी से बढ़ती है। यह प्रक्रिया उसी तरह काम करती है जैसे आवर्धक कांच करता है। कई बार यह गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि धुआं उठने लगता है और आग लगने की संभावना बन जाती है।
चश्मा और गैजेट भी बन सकते हैं वजह
कार के डैशबोर्ड पर रखा चश्मा या सनग्लास भी खतरे से खाली नहीं है। इसके लेंस सूरज की रोशनी को केंद्रित कर देते हैं, जिससे प्लास्टिक सतह पिघल सकती है या आग पकड़ सकती है। वहीं मोबाइल, पावर बैंक और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जोखिम बढ़ाते हैं। इनमें मौजूद बैटरी ज्यादा गर्मी सहन नहीं कर पाती और फटने की स्थिति में पहुंच सकती है। खासकर सीधी धूप में रखे गैजेट ज्यादा खतरनाक साबित होते हैं।
सैनिटाइजर और स्प्रे से बढ़ता खतरा
गर्मी के मौसम में सैनिटाइजर और परफ्यूम जैसी चीजें भी कार के अंदर रखना जोखिम भरा होता है। इनमें मौजूद अल्कोहल अत्यधिक ज्वलनशील होता है, जो ज्यादा तापमान में तेजी से वाष्पित होकर आग पकड़ सकता है। इसके अलावा डिओडोरेंट और एयर फ्रेशनर के कैन भी दबाव में रहते हैं और ज्यादा गर्मी में फट सकते हैं। यह स्थिति कार में आग लगने का बड़ा कारण बन सकती है।
थोड़ी सावधानी से टल सकता है खतरा
गर्मियों में कार का इस्तेमाल करते समय छोटी-छोटी सावधानियां बेहद जरूरी हैं। कोशिश करें कि गाड़ी को छांव में पार्क करें और अंदर किसी भी संवेदनशील चीज को न छोड़ें। अगर मजबूरी में कुछ रखना पड़े तो उसे ढककर रखें। यह आदत न केवल आपकी गाड़ी को सुरक्षित रखेगी बल्कि किसी बड़े हादसे से भी बचा सकती है।
