उत्तर प्रदेश में रसोई गैस को लेकर बड़ा बदलाव लागू हो चुका है। अब जिन घरों में पाइपलाइन से प्राकृतिक गैस यानी PNG पहुंच चुकी है, वहां LPG सिलेंडर रखना संभव नहीं होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि एक ही घर में दो गैस कनेक्शन नहीं चलेंगे। इसका मतलब है कि PNG कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को अपना LPG सिलेंडर सरेंडर करना ही पड़ेगा। यह फैसला पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश 2026 के तहत लागू किया गया है, जिसे केंद्र सरकार ने हाल ही में अधिसूचित किया है।
3 महीने का अल्टीमेटम, फिर सप्लाई बंद
सरकार और गैस कंपनियों ने उपभोक्ताओं को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। जिन घरों में PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए सूचना दी जा रही है। नोटिस मिलने के बाद उपभोक्ताओं को 3 महीने का समय दिया जाएगा। अगर इस अवधि में LPG कनेक्शन सरेंडर नहीं किया गया, तो संबंधित पते पर सिलेंडर की सप्लाई स्वतः बंद कर दी जाएगी। यानी अब विकल्प नहीं, बल्कि नियम के तहत बदलाव करना अनिवार्य हो गया है।
तेजी से बढ़ रहा PNG नेटवर्क
प्रदेश में PNG कनेक्शन का विस्तार तेजी से हो रहा है। रोजाना करीब 2000 नए कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं। 12 से ज्यादा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां राज्य में सक्रिय हैं और अधिकांश शहरों में पाइपलाइन नेटवर्क तैयार कर चुकी हैं। कई कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में पहले ही 24 घंटे PNG सप्लाई शुरू हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा घरों को इस सुविधा से जोड़ा जाए ताकि सिलेंडर पर निर्भरता कम हो सके।
क्यों लिया गया ये बड़ा फैसला?
सरकार का मानना है कि PNG गैस LPG से ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक है। इसमें सिलेंडर खत्म होने की चिंता नहीं रहती और गैस लगातार मिलती रहती है। इसी वजह से अब नीति में बदलाव कर इसे प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही एक घर में दो गैस सिस्टम रखने से सप्लाई और सब्सिडी मैनेजमेंट में दिक्कत आती थी, जिसे खत्म करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
अब क्या करें उपभोक्ता?
अगर आपके इलाके में PNG लाइन बिछ चुकी है और आपको नोटिस मिल चुका है, तो समय रहते LPG कनेक्शन सरेंडर करना ही बेहतर होगा। देरी करने पर सप्लाई बंद हो सकती है और बाद में दोबारा कनेक्शन लेना मुश्किल हो सकता है। गैस कंपनियां खुद घर-घर जाकर लोगों को समझा रही हैं और कनेक्शन देने की प्रक्रिया को आसान बना रही हैं।
आगे क्या बदलेगा सिस्टम?
इस फैसले के बाद आने वाले समय में रसोई गैस का पूरा सिस्टम बदलता नजर आएगा। सिलेंडर की जगह पाइपलाइन गैस आम हो जाएगी और शहरों में नई व्यवस्था पूरी तरह लागू हो सकती है। फिलहाल साफ संकेत यही है कि सरकार PNG को ही भविष्य का मुख्य ईंधन बनाना चाहती है और अब उसी दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
