चार धाम यात्रा 2026 की शुरुआत के साथ उत्तराखंड के पवित्र धामों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर खोल दिए गए, जिससे भक्तों में खास उत्साह देखने को मिला। यह चार धाम यात्रा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है, जहां दर्शन करने का विशेष धार्मिक महत्व है।
रजिस्ट्रेशन है अनिवार्य नियम
यात्रा पर जाने से पहले रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी कर दिया गया है। श्रद्धालु ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए उत्तराखंड पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चार धाम रजिस्ट्रेशन के विकल्प को चुनना होता है और अपनी जानकारी भरकर साइन अप करना होता है। इसके अलावा Tourist Care Uttarakhand मोबाइल ऐप के जरिए भी आसानी से रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है।
ऑफलाइन पंजीकरण भी आसान
जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया नहीं कर पाते, वे ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन भी कर सकते हैं। इसके लिए ऋषिकेश या सोनप्रयाग जैसे स्थानों पर जाकर पहचान पत्र के साथ फॉर्म भरना होता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों की सुविधा के लिए पर्याप्त काउंटर बनाए गए हैं, ताकि प्रक्रिया सरल और तेज हो सके।
कैसे पहुंचे बद्रीनाथ धाम
बद्रीनाथ धाम पहुंचने के लिए तीन मुख्य रास्ते उपलब्ध हैं। हवाई मार्ग सबसे तेज है, जिसमें जॉली ग्रांट एयरपोर्ट तक उड़ान लेकर वहां से टैक्सी द्वारा धाम पहुंचा जा सकता है। रेल मार्ग के लिए श्रद्धालु ऋषिकेश रेलवे स्टेशन तक ट्रेन से आ सकते हैं और फिर बस या टैक्सी का सहारा ले सकते हैं।
बस और सड़क मार्ग भी विकल्प
सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए दिल्ली से हरिद्वार और ऋषिकेश तक सीधी बसें उपलब्ध हैं। यहां से आगे बद्रीनाथ तक जाने के लिए बस और टैक्सी दोनों की सुविधा मिल जाती है। यह तरीका बजट के हिसाब से ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है।
सुविधा और सुरक्षा पर खास ध्यान
चार धाम यात्रा के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए यात्रा करें। सही योजना और रजिस्ट्रेशन के साथ यह यात्रा न सिर्फ आसान बनती है बल्कि आध्यात्मिक अनुभव को भी और खास बना देती है।
