अमेरिका और ईरान के बीच भले ही संघर्षविराम की घोषणा हो चुकी है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो अब तक पूरी तरह नहीं खुला है। इस अहम समुद्री रास्ते से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई गुजरती है, लेकिन मौजूदा हालात में यहां से जहाजों की आवाजाही बेहद सीमित हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक संघर्षविराम के बाद अब तक केवल 2 से 3 जहाज ही इस रास्ते से गुजर पाए हैं।
ईरान का नया रूट और चेतावनी
ईरान ने इस बीच एक बड़ा कदम उठाते हुए जहाजों के लिए वैकल्पिक मार्ग का ऐलान किया है। ईरान पोर्ट्स एंड मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन ने बताया कि होर्मुज क्षेत्र में यातायात का नया विभाजन तय किया गया है। इसके साथ ही ईरान ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में बारूदी सुरंगों का खतरा बना हुआ है, इसलिए जहाज नए रूट का इस्तेमाल करें। बताया जा रहा है कि ईरान ने इस महीने करीब एक दर्जन माइन्स बिछाए हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है।
नया रास्ता कैसे करेगा काम
नई व्यवस्था के तहत जहाजों को केश्म द्वीप और लारक द्वीप के बीच से गुजरना होगा। यह पूरा रास्ता ईरान के नियंत्रण वाले जल क्षेत्र में आता है, जहां आईआरजीसी की निगरानी रहती है। एंट्री के लिए जहाजों को ओमान सागर से लारक द्वीप के उत्तर हिस्से से होकर फारस की खाड़ी में जाना होगा, जबकि बाहर निकलते समय उन्हें दक्षिणी हिस्से से होकर गुजरना होगा। इस तरह ईरान इस पूरे मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहता है।
लेबनान में हमलों से बढ़ा तनाव
हालात इसलिए और बिगड़ गए हैं क्योंकि इजराइल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं। खासकर हिजबुल्ला के ठिकानों पर लगातार हमले हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बेरूत में हुए हमलों में 182 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी के जवाब में ईरान ने होर्मुज को बंद रखा है, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया है।
बातचीत पर भी अनिश्चितता
ईरान के शीर्ष नेताओं ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात में शांति वार्ता पर भरोसा करना मुश्किल है। वहीं अमेरिका लगातार होर्मुज को खोलने की मांग कर रहा है ताकि वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति सामान्य हो सके। लेकिन मौजूदा स्थिति यह दिखा रही है कि सीजफायर के बावजूद संघर्ष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
दुनिया पर असर
होर्मुज का बंद रहना सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट बन सकता है। तेल सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों में उछाल और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि यह संकट कब और कैसे खत्म होगा।
