घर बनाते समय लोग हर कोने का सही इस्तेमाल करना चाहते हैं। कई घरों में सीढ़ियों के नीचे खाली जगह बच जाती है और लोग वहीं छोटा मंदिर बना देते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे सही नहीं माना गया है। मान्यता है कि पूजा घर भगवान का स्थान होता है इसलिए उसे ऐसी जगह होना चाहिए जहां शांति हो साफ-सफाई हो और लोग सम्मान के साथ बैठकर पूजा कर सकें। सीढ़ियों के नीचे मंदिर बनाने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होने की बात कही जाती है।
ऊपर से गुजरते हैं लोगों के कदम
सीढ़ियों के नीचे मंदिर बनाने की सबसे बड़ी वजह यह बताई जाती है कि उसके ऊपर से लोग लगातार आते जाते रहते हैं। वास्तु मान्यताओं के अनुसार देवी देवताओं के स्थान के ऊपर से पैर रखकर गुजरना उचित नहीं माना जाता। घर के सदस्य दिनभर सीढ़ियों का इस्तेमाल करते हैं जिससे मंदिर के ऊपर आवाजाही बनी रहती है। इसी कारण इसे पूजा स्थल की गरिमा के खिलाफ माना जाता है और लोग इसे वास्तु दोष से जोड़ते हैं।
पूजा के समय नहीं मिलता शांत माहौल
पूजा घर ऐसी जगह होना चाहिए जहां मन शांत रहे और ध्यान लगाने में परेशानी न हो। सीढ़ियों के नीचे जगह अक्सर छोटी अंधेरी और बंद होती है। वहां हवा और रोशनी भी कम पहुंचती है। जब लोग ऊपर नीचे जाते हैं तो आवाज आती रहती है और पूजा करने वाले का ध्यान भटक सकता है। इसलिए मंदिर के लिए खुली साफ और शांत जगह को बेहतर माना जाता है।
घर के माहौल पर पड़ने की मान्यता
वास्तु शास्त्र में कहा जाता है कि पूजा घर गलत जगह होने पर घर की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर हो सकती है। इससे परिवार के लोगों को मानसिक तनाव बेचैनी या आपसी मतभेद जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। हालांकि यह धार्मिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित बात है लेकिन घर में पूजा स्थल को सम्मानजनक और व्यवस्थित जगह पर रखना हर परिवार के लिए बेहतर माना जाता है।
मंदिर के लिए कौन सी दिशा सही
वास्तु के अनुसार घर का मंदिर उत्तर पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में बनाना शुभ माना जाता है। यह दिशा पूजा ध्यान और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए अच्छी बताई जाती है। अगर वहां जगह नहीं है तो मंदिर को पूर्व या उत्तर दिशा में बनाया जा सकता है। मंदिर के सामने पर्याप्त जगह होनी चाहिए ताकि पूजा करते समय बैठने और दीपक जलाने में दिक्कत न आए।
सीढ़ियों के नीचे पहले से मंदिर हो तो क्या करें
अगर घर में पहले से सीढ़ियों के नीचे मंदिर बना हुआ है तो घबराने की जरूरत नहीं है। कोशिश करें कि वहां मूर्तियों की जगह तस्वीर या छोटा पूजा स्थान रखा जाए और भविष्य में मंदिर को किसी बेहतर जगह पर शिफ्ट कर दिया जाए। मंदिर वाली जगह को हमेशा साफ रखें और वहां जूते चप्पल या बेकार सामान न रखें। सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा स्थान ऐसा हो जहां श्रद्धा सम्मान और मन की शांति बनी रहे।
