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देश में अगले हफ्ते से शुरू होगा SIR अभियान: चुनावी राज्यों में होगी पहली शुरुआत

देश में अगले हफ्ते से शुरू होगा SIR अभियान: चुनावी राज्यों में होगी पहली शुरुआत

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। अगले हफ्ते से देशव्यापी स्तर पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन - SIR) की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। यह अभियान सबसे पहले उन 10-15 राज्यों में लागू होगा, जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे चुनावी राज्यों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन बनाया जा सके।

यह घोषणा चुनावी पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। ईसीआई ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि SIR का फोकस उन क्षेत्रों पर होगा जहां विदेशी अवैध प्रवासियों की घुसपैठ की आशंका अधिक है। आयोग का मानना है कि सटीक मतदाता सूची न केवल चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाएगी, बल्कि फर्जी वोटिंग और डुप्लिकेट एंट्रीज को भी रोकेगी।

SIR क्या है और क्यों आवश्यक?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची के नियमित अद्यतन से कहीं आगे की प्रक्रिया है। यह एक व्यापक अभियान है जिसमें घर-घर जाकर सत्यापन किया जाता है, जन्म स्थान की जांच होती है और संदिग्ध प्रविष्टियों को हटाया जाता है। खासतौर पर, अवैध विदेशी माइग्रेंट्स की पहचान पर जोर दिया जाएगा। ईसीआई के अनुसार, इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को 'शून्य त्रुटि' स्तर तक पहुंचाना है।

पिछले कुछ वर्षों में, कई राज्यों में मतदाता सूची में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, सीमावर्ती क्षेत्रों में बांग्लादेश या अन्य देशों से आए अवैध प्रवासियों के नाम दर्ज होने की रिपोर्ट्स आई हैं। SIR के माध्यम से इनकी जन्म स्थान की जांच कर सूची से नाम काटे जाएंगे। यह प्रक्रिया डिजिटल टूल्स और फील्ड वेरिफिकेशन का संयोजन होगी, जिसमें आधार, पैन और अन्य दस्तावेजों का मिलान भी शामिल है।

ईसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "SIR का पहला चरण नवंबर के प्रारंभ से शुरू होगा। हमारा लक्ष्य है कि 2026 के चुनावों से पहले सभी प्रासंगिक राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाए।" आयोग ने स्पष्ट किया है कि जहां स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं या होने वाले हैं, वहां SIR स्थगित रहेगी, क्योंकि वहां की चुनावी मशीनरी पहले से व्यस्त है।

चुनावी राज्यों में प्राथमिकता क्यों?

2026 में कई महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करेंगे। असम, जहां बीजेपी की सरकार है, सीमावर्ती क्षेत्रों के कारण SIR के लिए संवेदनशील राज्य है। यहां अवैध घुसपैठ की समस्या लंबे समय से चली आ रही है। इसी तरह, तमिलनाडु और केरल में द्रविड़ राजनीति का गढ़ होने के बावजूद, शहरीकरण के कारण मतदाता सूची में अपडेट की जरूरत है। पश्चिम बंगाल, जहां तृणमूल कांग्रेस सत्ता में है, हाल के विधानसभा चुनावों में विवादास्पद मुद्दों का सामना कर चुका है। पुडुचेरी जैसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश में भी यह प्रक्रिया तेजी से लागू होगी।

ईसीआई का प्लान है कि इन राज्यों में SIR के जरिए कम से कम 5-10 प्रतिशत मतदाता सूची का पुनरीक्षण हो। अनुमान है कि करोड़ों मतदाताओं के नामों की जांच होगी, जिससे लाखों फर्जी या पुरानी एंट्रीज हट सकती हैं। इससे न केवल वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा, बल्कि चुनावी परिणामों की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। राजनीतिक दलों ने भी इसकी सराहना की है। कांग्रेस नेता ने कहा, "यह कदम स्वागतयोग्य है, लेकिन पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए।" वहीं, बीजेपी ने इसे "लोकतंत्र की सफाई" करार दिया।

प्रक्रिया कैसे चलेगी?

SIR की प्रक्रिया बहु-स्तरीय होगी। सबसे पहले, बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) घर-घर जाकर फॉर्म 6 (नया नाम जोड़ने), फॉर्म 7 (नाम हटाने) और फॉर्म 8 (सुधार) का वितरण करेंगे। डिजिटल ऐप्स के माध्यम से डेटा अपलोड होगा, और आयोग की वोटर हेल्पलाइन 1950 पर शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी। समयसीमा के अनुसार, दावे और आपत्तियां 15 दिनों के अंदर निपटाई जाएंगी।

आयोग ने राज्यों को निर्देश दिया है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से फोकस हो। विशेष रूप से, महिलाओं, युवाओं और प्रवासी मजदूरों के नामों को अद्यतन करने पर जोर। इसके अलावा, एनआरआई वोटर्स के लिए ई-वोटिंग सुविधा को मजबूत करने की योजना भी है। कुल मिलाकर, यह अभियान 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद पहली बड़ी पहल है, जो 2029 के महा-चुनाव की तैयारी का हिस्सा बनेगी।

SIR की शुरुआत में कुछ चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, राजनीतिक दबाव और लॉजिस्टिकल मुद्दे बाधा बन सकते हैं। उदाहरण के लिए, असम में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) के बाद SIR पर सवाल उठ सकते हैं। लेकिन ईसीआई का दावा है कि स्वतंत्र निगरानी और ट्रेनिंग से ये दूर होंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रक्रिया चुनावी परिदृश्य बदल सकती है। यदि सूची शुद्ध हुई, तो सीटों का समीकरण प्रभावित हो सकता है। खासकर उन राज्यों में जहां सीमावर्ती मुद्दे प्रमुख हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले SIR में 20 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते थे।

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