गोल्ड पर रोक की सलाह के बीच अब सिल्वर निवेश को लेकर उठे बड़े सवाल, क्या कहते हैं एक्सपर्ट, पढ़ें यहां
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से खर्च में कटौती करने और जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करने की अपील की। उन्होंने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने, गैर जरूरी विदेश यात्राएं टालने और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह दी। पीएम मोदी की यह अपील ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष की वजह से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी हुई है। इसके बाद अब देशभर में सोना और चांदी निवेश को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
क्या चांदी खरीदना सही विकल्प?
पीएम मोदी की अपील के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर लोग सोना नहीं खरीदेंगे तो क्या चांदी की खरीद बढ़ सकती है। जानकारों का कहना है कि भारत बड़ी मात्रा में चांदी का भी आयात करता है। देश अपनी जरूरत की लगभग 90 प्रतिशत चांदी विदेशों से मंगाता है। इसमें ब्रिटेन, चीन और हांगकांग जैसे देश शामिल हैं। चांदी का भुगतान भी डॉलर में ही किया जाता है। ऐसे में अगर लोग बड़ी संख्या में चांदी खरीदना शुरू करते हैं तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।
फिर सोने का ही क्यों हुआ जिक्र
सरकार और विशेषज्ञों का मानना है कि सोने का आयात बिल चांदी के मुकाबले कहीं ज्यादा बड़ा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड खरीदार देशों में शामिल है। यहां सोने को सिर्फ गहनों के रूप में नहीं बल्कि सुरक्षित निवेश और रिजर्व एसेट के तौर पर भी देखा जाता है। गांव से लेकर शहर तक लोग अपनी बचत का बड़ा हिस्सा सोने में लगाते हैं। यही वजह है कि सरकार ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सबसे पहले सोने की खरीद कम करने की सलाह दी है।
चांदी की अलग है भूमिका
विशेषज्ञ बताते हैं कि चांदी का इस्तेमाल सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक चिप्स और कई औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर होता है। यही कारण है कि सरकार फिलहाल चांदी को लेकर उतनी सख्ती दिखाती नजर नहीं आ रही। हालांकि अगर आने वाले समय में लोग बड़ी मात्रा में सोने की जगह चांदी खरीदना शुरू करते हैं तो सरकार इस पर आयात शुल्क बढ़ाने जैसे कदम उठा सकती है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम रखा जा सके।
कीमतों में भी बड़ा उतार चढ़ाव
वैश्विक तनाव का असर सोना और चांदी दोनों की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। फिलहाल देश में चांदी की कीमत करीब 2.75 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। बाजार में लगातार उतार चढ़ाव बना हुआ है। निवेशकों के बीच भी असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। विशेषज्ञ लोगों को फिलहाल सोच समझकर निवेश करने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
विदेशी मुद्रा बचाना बड़ी चुनौती
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। कच्चे तेल से लेकर सोना और चांदी तक कई जरूरी चीजों के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में सरकार की कोशिश विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखने की है। माना जा रहा है कि अगर लोग सोने की खरीद कम करते हैं तो इससे अरबों डॉलर की बचत हो सकती है और वही पैसा ऊर्जा और जरूरी आयात जरूरतों पर खर्च किया जा सकेगा।
