देश में श्रम सुधार को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चा अब नए दौर में पहुंच गई है। केंद्र सरकार ने चार नए लेबर कोड के अंतिम नियमों को अधिसूचित कर दिया है। इसके बाद अब वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े पुराने कानूनों की जगह नई व्यवस्था लागू होगी। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा देना और कंपनियों के लिए नियमों को आसान बनाना है। नए लेबर कोड लागू होने के बाद नौकरी करने वाले करोड़ों कर्मचारियों की सैलरी, छुट्टियां और कामकाज की व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
टेक होम सैलरी पर असर
नए नियमों के अनुसार अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसके कुल सीटीसी का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी होगा। इसका सीधा असर कर्मचारियों की टेक होम सैलरी पर पड़ सकता है। जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी अभी कम है उनके प्रोविडेंट फंड यानी पीएफ में योगदान बढ़ जाएगा। इससे हाथ में मिलने वाली रकम थोड़ी कम हो सकती है लेकिन रिटायरमेंट फंड और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में इससे कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
ग्रेच्युटी नियमों में राहत
सरकार ने नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी नियमों को लेकर भी बड़ा बदलाव किया है। अब फिक्स्ड टर्म यानी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अगर कोई कर्मचारी एक साल की सेवा पूरी कर लेता है तो वह भी ग्रेच्युटी पाने का हकदार होगा। माना जा रहा है कि इससे निजी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा और अनुबंध कर्मचारियों को भी ज्यादा सुरक्षा मिलेगी।
काम के घंटे और छुट्टियां
नए लेबर कोड के मुताबिक अब सप्ताह में कुल काम के घंटे 48 तय किए गए हैं। कंपनियां चाहें तो चार दिन का वर्क वीक लागू कर सकती हैं। इसके बदले कर्मचारियों को तीन दिन की छुट्टी देनी होगी। अगर कोई कर्मचारी तय समय से ज्यादा काम करता है तो उसे ओवरटाइम का दोगुना भुगतान मिलेगा। इसके अलावा 180 दिन काम पूरा करने के बाद कर्मचारी अर्जित अवकाश यानी अर्न्ड लीव पाने के हकदार होंगे। सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों और कंपनियों दोनों को लचीलापन मिलेगा।
महिलाओं के लिए नए अवसर
नए लेबर कोड में महिलाओं के लिए भी अहम बदलाव किए गए हैं। अब महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है। यानी शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच भी महिलाएं नौकरी कर सकेंगी। हालांकि कंपनियों को सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाएं देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा समान काम के लिए पुरुष और महिला कर्मचारियों को समान वेतन देने का नियम भी और मजबूत किया गया है। इससे कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
कर्मचारियों की जिंदगी में बदलाव
सरकार का दावा है कि नए लेबर कोड लागू होने से देश की श्रम व्यवस्था ज्यादा आधुनिक और पारदर्शी बनेगी। इससे कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और कंपनियों को आसान नियमों का फायदा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह बदलाव भारत के रोजगार ढांचे को पूरी तरह बदल सकते हैं और नौकरीपेशा लोगों की कार्यशैली में बड़ा असर दिखाई दे सकता है।
