पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक सनसनीखेज बयान में देश के प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि देश के आधे सरकारी अफसर भ्रष्टाचारी हैं, जिसके कारण देश की शासन व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, आतंकवाद और पड़ोसी देशों के साथ तनावपूर्ण रिश्तों से जूझ रहा है। हालांकि ख्वाजा के इस बयान से सियासी गलियारों मे हलचल तेज हो गई है।
ख्वाजा आसिफ ने कहा, "हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारे सिस्टम में भ्रष्टाचार जड़ें जमा चुका है। मैं यह कहने में संकोच नहीं करूंगा कि हमारे आधे से ज्यादा अफसर भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। यह हमारे देश की प्रगति और विकास में सबसे बड़ा रोड़ा है।" इस बयान ने पाकिस्तान की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह पहली बार है जब किसी वरिष्ठ मंत्री ने इतने खुले तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों पर इतना बड़ा आरोप लगाया है।
आसिफ ने आगे कहा कि भ्रष्टाचार के कारण आम जनता का सरकार पर भरोसा भी कम हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से रक्षा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विभागों में भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया। ख्वाजा ने आगे कहा पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से कर्ज लेने के लिए जूझ रहा है, और भ्रष्टाचार के ये आरोप देश की आर्थिक विश्वसनीयता पर और सवाल उठा सकते हैं।
ख्वाजा आसिफ के बयान पर विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने ख्वाजा आसिफ के इस बयान को सरकार की नाकामी का सबूत बताते हुए तीखी आलोचना की है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के एक प्रवक्ता ने कहा, "रक्षा मंत्री का यह बयान स्वीकारोक्ति है कि शहबाज शरीफ सरकार भ्रष्टाचार को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। अगर आधे अफसर भ्रष्ट हैं, तो सरकार अब तक क्या कर रही थी?" विपक्ष ने मांग की है कि भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और उनकी सूची सार्वजनिक की जाए। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने ख्वाजा आसिफ के बयान का बचाव करते हुए कहा कि यह उनकी "ईमानदारी" को दर्शाता है। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हमारे रक्षा मंत्री ने सच बोलने की हिम्मत दिखाई है। यह सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, और जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
जनता ने क्या कहा?
पाकिस्तान की जनता ने इस बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने ख्वाजा आसिफ की ईमानदारी की सराहना की, तो कुछ ने इसे सरकार की कमजोरी का प्रतीक बताया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर सरकार को भ्रष्टाचार की इतनी गहरी जानकारी है, तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। एक यूजर ने लिखा, "अगर आधे अफसर भ्रष्ट हैं, तो बाकी आधे क्या कर रहे हैं? क्या वे चुपचाप इसे देख रहे हैं?
आपको बता दें ख्वाजा आसिफ के इस बयान ने पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नई बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान के सामने पहले से ही कई चुनौतियां हैं, और भ्रष्टाचार का यह मुद्दा इन चुनौतियों को और जटिल बना सकता है। ख्वाजा आसिफ के इस बयान ने न केवल सरकारी तंत्र की पोल खोल दी है, बल्कि यह भी सवाल उठाया है कि क्या पाकिस्तान इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए तैयार है।



