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संभल हिंसा: न्यायिक आयोग ने मुख्यमंत्री योगी को सौंपी 450 पन्नों की रिपोर्ट

संभल हिंसा: न्यायिक आयोग ने मुख्यमंत्री योगी को सौंपी 450 पन्नों की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग ने गुरुवार, 28 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी 450 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी।

आपको बता दें संभल में हुई हिंसा की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग के अन्य दो सदस्यों में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद शामिल थे। आयोग को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था, जिसमें यह जांच करना शामिल था कि हिंसा सुनियोजित साजिश थी या अचानक हुई घटना।

24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। यह सर्वे चंदौसी के सिविल जज (वरिष्ठ प्रभाग) आदित्य सिंह की अदालत के आदेश पर किया गया था, जिसमें मस्जिद के स्थान पर पहले हरिहर मंदिर होने का दावा किया गया था। 19 नवंबर को पहला सर्वे हुआ था, और 24 नवंबर को दूसरे सर्वे के दौरान माहौल बिगड़ गया। सर्वे टीम पर पथराव हुआ, जिसके बाद स्थिति अनियंत्रित हो गई। पुलिस को हालात काबू में करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए।

संभल की रिपोर्ट में क्या-क्या?

  • रिपोर्ट में संभल की जनसंख्या में आए बदलावों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अनुसार, आजादी के समय (1947 में) संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदू आबादी लगभग 45% थी, जो अब घटकर 15-20% रह गई है। इस बदलाव को दंगों और तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ा गया है। वर्तमान में, संभल में लगभग 80-85% मुस्लिम आबादी और 15-20% हिंदू आबादी है। यह डेमोग्राफिक बदलाव आयोग ने गंभीर बताया है और इसे प्रशासन की अनदेखी और योजनाबद्ध प्रयासों से जोड़ा है।
  • रिपोर्ट में संभल में आजादी के बाद से हुए 15 बड़े दंगों का उल्लेख है, जिनमें 1947, 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001, और 2019 शामिल हैं। इन दंगों में हिंदू आबादी सबसे अधिक प्रभावित हुई, और बार-बार की हिंसा के कारण पलायन बढ़ा। विशेष रूप से, 1978 के दंगे में 184 हिंदुओं को जिंदा जलाने की घटना का उल्लेख किया गया है।
  • आयोग को सबूत मिले हैं कि संभल में हुए दंगों में विदेशी हथियारों, विशेष रूप से अमेरिका में बने हथियारों का उपयोग हुआ था। यह दावा रिपोर्ट में गंभीरता से उठाया गया है और इसे सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया गया है।
  • रिपोर्ट में संभल को कुछ आतंकवादी संगठनों, जैसे अलकायदा और हरकत उल मुजाहिदीन, का अड्डा बनने का दावा किया गया है। इसमें बाहरी ताकतों और स्थानीय नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिन्होंने माहौल खराब करने में योगदान दिया।
  • रिपोर्ट में कुछ तत्कालीन अधिकारियों की लापरवाही और खुफिया तंत्र की नाकामी का भी जिक्र है। आयोग ने सुझाव दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट के बाद सियासत तेज

समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने इसकी गोपनीयता पर सवाल उठाए, दावा करते हुए कि अगर यह गोपनीय है, तो इसके विवरण मीडिया में कैसे आए। उन्होंने इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। वहीं, मौलाना साजिद रशीदी ने इस रिपोर्ट पर कहा कि यह दंगे और नफरत फैलाने का कारण बन सकती है।

आपको बता दें रिपोर्ट को पहले उत्तर प्रदेश राज्य कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे आगामी विधानसभा सत्र में सदन में रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है।

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