2027 विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी नेतृत्व लगातार जिलों के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर रहा है और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 में अपनाए गए मॉडल को आधार बनाकर इस बार भी रणनीति तैयार की जा रही है। पार्टी का मकसद समय रहते मजबूत उम्मीदवारों की पहचान करना है।
150 सीटों पर मंथन
सूत्रों के अनुसार सपा अब तक करीब 35 जिलों की 150 विधानसभा सीटों को लेकर समीक्षा कर चुकी है। जिला स्तर पर संगठन के नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है। पार्टी जुलाई के पहले सप्ताह तक उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी करना चाहती है। इसके लिए स्थानीय समीकरणों और जनाधार का भी आकलन किया जा रहा है।
दूसरे दलों पर नजर
इस बार सपा ने उम्मीदवारों की तलाश में एक नया तरीका अपनाया है। पार्टी ऐसे नेताओं पर भी नजर रख रही है जो फिलहाल दूसरे दलों में हैं लेकिन भविष्य में राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार पाला बदल सकते हैं। भाजपा, आरएलडी, एसबीएसपी और अन्य दलों के कुछ प्रभावशाली नेताओं को लेकर भी चर्चा चल रही है। पार्टी का मानना है कि ऐसे चेहरे कई सीटों पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
चर्चा में कई नाम
राजनीतिक गलियारों में कुछ बड़े नामों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। मऊ से विधायक अब्बास अंसारी का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है। हाल के दिनों में उनके कार्यालय पर सपा के बैनर दिखाई देने के बाद अटकलों का दौर शुरू हो गया। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इसके अलावा कुछ ऐसे नेताओं को भी लेकर चर्चाएं हैं जिनके संबंध पहले सपा नेतृत्व से खराब रहे हैं।
मजबूत सीटों पर भी फोकस
सपा सिर्फ कमजोर सीटों पर ही नहीं बल्कि अपनी पारंपरिक मजबूत सीटों पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी चाहती है कि जिन सीटों पर उसका दबदबा रहा है वहां संगठन और उम्मीदवार दोनों मजबूत बने रहें। करीब 24 जिलों में स्थानीय नेताओं को विशेष जिम्मेदारियां दी गई हैं ताकि जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की स्वीकार्यता का सही आकलन किया जा सके।
अखिलेश का सख्त संदेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि जो संगठनात्मक पदाधिकारी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देना होगा। इस फैसले के बाद कई नेताओं ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है और कुछ पद छोड़ भी चुके हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे संगठन और टिकट की दावेदारी के बीच किसी तरह का टकराव नहीं होगा। सपा की यह पूरी कवायद साफ संकेत देती है कि पार्टी 2027 की लड़ाई के लिए अभी से पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी है।
