भारतीय युवाओं में विदेश घूमने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। खासकर नई पीढ़ी यानी जेनरेशन जेड अब अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को लेकर पहले से ज्यादा उत्साहित नजर आ रही है। एक हालिया सर्वे के अनुसार, 2026 में बड़ी संख्या में भारतीय अपनी विदेश यात्राओं पर अधिक खर्च करने की योजना बना रहे हैं। युवाओं के बीच नई जगहों को देखने और अलग-अलग संस्कृतियों को समझने की इच्छा लगातार बढ़ रही है।
बजट पर पूरा फोकस
हालांकि विदेश घूमने का उत्साह बढ़ा है, लेकिन युवा अपने बजट को लेकर भी काफी सतर्क हैं। सर्वे में सामने आया है कि कई यात्री 1 लाख रुपये से अधिक खर्च करने के पक्ष में नहीं हैं। यही वजह है कि वे ऐसी जगहों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां कम खर्च में बेहतर यात्रा अनुभव मिल सके। खर्च और सुविधाओं के बीच संतुलन बनाना अब उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
दक्षिण-पूर्व एशिया पहली पसंद
बजट फ्रेंडली देशों की बात करें तो दक्षिण-पूर्व एशिया भारतीय युवाओं की सबसे पसंदीदा मंजिल बनकर उभरा है। थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों में कम खर्च में घूमने, रहने और खाने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बाद यूरोप और मध्य पूर्व के देशों को भी यात्रियों की पसंद में जगह मिली है। बेहतर कनेक्टिविटी और आसान यात्रा विकल्प भी इन देशों को लोकप्रिय बना रहे हैं।
कैश और कार्ड दोनों का इस्तेमाल
विदेश यात्रा के दौरान भुगतान के तरीके में भी दिलचस्प रुझान देखने को मिला है। बड़ी संख्या में यात्री अंतरराष्ट्रीय कार्ड और विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। वहीं कई लोग अब भी यात्रा से पहले नकदी बदलवाकर साथ ले जाना बेहतर मानते हैं। नई पीढ़ी डिजिटल भुगतान को अपना रही है, लेकिन नकदी पर भरोसा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
सरकारी राहत से बढ़ा उत्साह
केंद्र सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय टूर पैकेज पर कर व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने के फैसले ने भी यात्रियों को राहत दी है। इससे विदेश यात्रा की योजना बनाने वाले लोगों का खर्च कुछ हद तक नियंत्रित रहने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है।
यात्रा अब बन रही प्राथमिकता
विशेषज्ञों का कहना है कि नई पीढ़ी अब सिर्फ बचत पर नहीं बल्कि अनुभवों पर भी खर्च करना चाहती है। यही कारण है कि विदेश यात्रा उनके लिए एक लग्जरी नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनती जा रही है। बजट का ध्यान रखते हुए दुनिया देखने की यह नई सोच आने वाले वर्षों में पर्यटन उद्योग को और गति दे सकती है।
