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RBI क्यों वापस ला रहा विदेशों में रखा सोना, बढ़ते तनाव के बीच गोल्ड रिजर्व पर बढ़ी चिंता

RBI क्यों वापस ला रहा विदेशों में रखा सोना, बढ़ते तनाव के बीच गोल्ड रिजर्व पर बढ़ी चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को मजबूत करने में जुटा हुआ है। पिछले कुछ सालों में RBI ने तेजी से सोने की खरीदारी की है और अब विदेशों में जमा अपना सोना वापस भारत लाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। मार्च 2026 तक भारत का कुल गोल्ड रिजर्व 880.52 मीट्रिक टन पहुंच चुका है। इनमें से करीब 680 मीट्रिक टन सोना अब भारत में ही रखा गया है। सिर्फ एक साल के भीतर भारत लगभग 168 मीट्रिक टन सोना विदेशों से वापस ला चुका है।

विदेशों में क्यों रखा जाता है सोना?

कई दशकों से भारत समेत दुनिया के बड़े देश अपना कुछ गोल्ड रिजर्व विदेशों में रखते रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण वैश्विक व्यापार और सुरक्षा माना जाता है। विदेशों में रखा सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही युद्ध, आर्थिक संकट या प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए भी अलग-अलग देशों में गोल्ड रिजर्व रखा जाता रहा है। भारत का काफी सोना अभी भी बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स जैसी विदेशी संस्थाओं के पास जमा है।

अब क्यों बदली रणनीति?

अब सवाल उठ रहा है कि RBI अचानक इतनी तेजी से सोना वापस क्यों ला रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह दुनिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने रूस के विदेशी मुद्रा भंडार और सोने पर कई प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद कई देशों को यह डर सताने लगा कि संकट की स्थिति में विदेशों में रखी संपत्तियों पर रोक लग सकती है। यही कारण है कि भारत समेत कई देश अपनी संपत्ति पर सीधा नियंत्रण चाहते हैं।

दुनिया के कई देश भी कर रहे ऐसा

भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो अपना सोना वापस ला रहा है। जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड और चेक गणराज्य जैसे देश भी अपने गोल्ड रिजर्व को वापस घरेलू तिजोरियों में शिफ्ट कर रहे हैं। इससे साफ है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अब आर्थिक सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। भारत ने भी पिछले तीन सालों में लगातार बड़ी मात्रा में सोना विदेशों से वापस मंगाया है।

आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा मामला

विशेषज्ञ मानते हैं कि सोना सिर्फ एक धातु नहीं बल्कि आर्थिक सुरक्षा का बड़ा आधार होता है। संकट के समय यही सोना देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। अगर सोना अपने देश में मौजूद हो तो जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल तुरंत किया जा सकता है। RBI का मानना है कि अपने गोल्ड रिजर्व को देश में रखने से बाहरी दबाव और वैश्विक प्रतिबंधों का खतरा कम होता है। यही वजह है कि अब भारत अपनी वित्तीय संप्रभुता को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

दुनिया की नजर भारत पर

भारत दुनिया के टॉप 10 गोल्ड रिजर्व वाले देशों में शामिल है। ऐसे में RBI की यह रणनीति पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही है। बढ़ते युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और वैश्विक तनाव के दौर में सोना फिर से सबसे सुरक्षित संपत्ति माना जा रहा है। इसी वजह से भारत अब अपने गोल्ड रिजर्व को धीरे-धीरे पूरी तरह घरेलू तिजोरियों में सुरक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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