अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब एक नया दावा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी की जानकारी 27 मई को ही ट्रस्ट और पुलिस तक पहुंच गई थी। पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को हिरासत में लिया था। दावा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एफआईआर दर्ज कराने थाने पहुंचे थे, लेकिन एक फोन कॉल आने के बाद बिना तहरीर दिए वापस लौट गए। इस दावे की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
10 दिन तक मामला सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ?
बताया जा रहा है कि घटना सामने आने के बाद भी करीब दस दिनों तक यह मामला सार्वजनिक नहीं हुआ। बाद में समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय और फिर अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाया, जिसके बाद मामला चर्चा में आया। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि घटना पहले ही सामने आ गई थी तो एफआईआर दर्ज कराने में देरी क्यों हुई और उस कथित फोन कॉल के पीछे कौन था।
SIT जांच में कई अहम सुराग
मामले की जांच कर रही एसआईटी और पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां जुटाई हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों में उनकी आय से कहीं अधिक लेनदेन के संकेत मिले हैं। कई संपत्तियों और वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चोरी का तरीका भी आया सामने
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि दान गणना के दौरान कैमरों की नजर से बचकर रकम निकाली जाती थी। एक व्यक्ति नकदी निकालता था जबकि अन्य लोग उसे घेरकर खड़े रहते थे। बाद में रकम छिपाकर बाहर ले जाई जाती थी। जांच एजेंसियां इन दावों की भी पुष्टि कर रही हैं।
6 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 6 जुलाई को प्रस्तावित है। इस बैठक में पूरे मामले की समीक्षा होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों को लेकर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, इस्तीफे या अन्य फैसलों को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
जांच पूरी होने का इंतजार
इस मामले में आठ आरोपी पहले ही गिरफ्तार होकर जेल भेजे जा चुके हैं। एसआईटी और पुलिस दोनों अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं। फोन कॉल, एफआईआर में देरी, बैंक लेनदेन और कथित मिलीभगत जैसे सभी बिंदुओं की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
