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लालबागचा राजा में नोटो की बारिश, 80 लोग गिनती में जुटे

लालबागचा राजा में नोटो की बारिश, 80 लोग गिनती में जुटे

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस साल 92वें गणेशोत्सव के पहले दिन ही भक्तों ने बप्पा के चरणों में जमकर चढ़ावा चढ़ाया। चढ़ावे की गिनती के लिए मंडल ने 80 लोगों की एक विशेष टीम तैनात की है, जो नकद, सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं की गिनती में जुटी हुई है।

लालबागचा राजा मंडल के कोषाध्यक्ष मंगेश दत्ताराम दलवी ने बताया कि पहले दिन तीन दानपात्र रखे गए थे, जिनमें से एक को खोला जा चुका है। गिनती की प्रक्रिया अभी जारी है, और इस बार चढ़ावे का आंकड़ा पिछले साल के 48 लाख रुपये के रिकॉर्ड को पार कर सकता है। मंडल को उम्मीद है कि इस बार 4 से 5 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त होगा। भक्तों ने न केवल नकद राशि, बल्कि सोना, चांदी, विदेशी मुद्राएं जैसे डॉलर, दीनार, यूरो और कीमती आभूषण भी अर्पित किए हैं। एक भक्त ने तो अपनी शादी का निमंत्रण पत्र भी बप्पा के चरणों में समर्पित किया।

तिरुपति बालाजी थीम से सजा दरबार

इस साल लालबागचा राजा का दरबार तिरुपति बालाजी की थीम पर सजाया गया है, जो भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। गणपति बप्पा ने भगवा रंग की धोती और सोने का मुकुट धारण किया है, जो उनकी भव्यता को और बढ़ा रहा है। मूर्ति की सजावट और मंडप की नक्काशीदार दीवारें भक्तों का ध्यान खींच रही हैं।

भक्तों की भारी भीड़

पहले दिन से ही लालबागचा राजा के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। अब तक 1,50,000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जिनमें से कई 8 से 10 घंटे तक कतार में खड़े रहे। महाराष्ट्र के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, राजस्थान जैसे राज्यों से भी भक्त बप्पा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंडल ने भक्तों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जिसमें सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक दर्शन की व्यवस्था शामिल है।

लालबागचा राजा मंडल दान में प्राप्त राशि का उपयोग सामाजिक कार्यों के लिए करता है। कमिटी के अनुसार, यह राशि गरीबों के भोजन, चिकित्सा और अन्य जरूरतों पर खर्च की जाती है। मंडल अपनी निःशुल्क अस्पताल और एम्बुलेंस सेवाओं के माध्यम से गरीबों की मदद करता है और प्राकृतिक आपदाओं में राहत कोष के लिए भी योगदान देता है।

लालबागचा राजा का इतिहास

लालबागचा राजा की स्थापना 1934 में हुई थी, जब लालबाग बाजार के मछुआरों और व्यापारियों ने अपनी आजीविका के लिए मन्नत मांगी थी। उनकी मन्नत पूरी होने पर इस परंपरा की शुरुआत हुई, जो आज मुंबई की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। इसे ‘नवसाचा गणपति’ यानी मन्नत पूरी करने वाला गणपति भी कहा जाता है। हर साल लाखों भक्त यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।

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