पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक आतंकी संगठन से कथित तौर पर जान से मारने की धमकी मिली है, जिसमें 15 अगस्त, 2025 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्हें निशाना बनाने की बात कही गई है। इस धमकी ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है, और पंजाब पुलिस ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, यह धमकी एक आतंकी संगठन से जुड़े व्यक्ति द्वारा दी गई, जिसने दावा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान हमले का निशाना होंगे। धमकी में स्पष्ट रूप से कहा गया कि "15 अगस्त को तुम निशाने पर रहोगे"। इस धमकी को गंभीरता से लेते हुए पंजाब पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि धमकी की सूचना एक गुप्त स्रोत से मिली थी, और इसे फोन कॉल या सोशल मीडिया के जरिए प्राप्त होने की संभावना है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि धमकी किस संगठन या व्यक्ति की ओर से दी गई है। खालिस्तानी आतंकी संगठनों पर संदेह जताया जा रहा है, क्योंकि पंजाब में हाल के वर्षों में ऐसी गतिविधियां देखी गई हैं।
पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसिया अलर्ट
धमकी मिलने के बाद पंजाब पुलिस ने तुरंत सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री के आवास, कार्यालय और उनके द्वारा दौरा किए जाने वाले सभी स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पंजाब पुलिस के डीजीपी सागर प्रीत हुड्डा ने चंडीगढ़ में कई संवेदनशील स्थानों पर आकस्मिक निरीक्षण किया, ताकि स्वतंत्रता दिवस के लिए सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की जा सके।
पुलिस ने आतंकी संगठनों के साथ-साथ संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को भी इस मामले में शामिल किया गया है, और वे धमकी के स्रोत का पता लगाने के लिए तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर रही हैं। इसके अलावा, पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया गया है, क्योंकि आतंकी गतिविधियों के लिए सीमा पार से हथियार और ड्रोन के जरिए सामग्री भेजे जाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
खालिस्तानी आतंकवाद का इतिहास
पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद का इतिहास रहा है, और हाल के वर्षों में ऐसी गतिविधियों में फिर से वृद्धि देखी गई है। 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या एक आत्मघाती हमले में हुई थी, जिसकी जिम्मेदारी बब्बर खालसा ने ली थी, हालांकि बाद में खालिस्तान कमांडो फोर्स को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया। इसके अलावा, 2015 में गुरदासपुर हमले और 2016-17 में हिंदू नेताओं पर लक्षित हमले जैसे मामले भी सामने आए हैं। हाल ही में, पंजाब पुलिस ने कई आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है और 2024 में 66 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बावजूद, सीमा पार से ड्रोन हमले और हथियारों की तस्करी की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस धमकी पर अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने इसे गंभीरता से लिया है। AAP के एक प्रवक्ता ने कहा, "हमारी सरकार लोगों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और ऐसी धमकियों से डरने वाली नहीं है। पंजाब पुलिस और अन्य एजेंसियां इस मामले को पूरी तरह से जांच रही हैं।"
विपक्षी दलों ने भी इस घटना की निंदा की है। शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को और मजबूत करने की जरूरत है। वहीं, कांग्रेस के एक नेता ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह पंजाब में आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाए।
स्वतंत्रता दिवस पर बढ़ाई गई सुरक्षा
15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने का फैसला लिया गया है। चंडीगढ़, अमृतसर, जालंधर और लुधियाना जैसे प्रमुख शहरों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं। सार्वजनिक समारोहों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन का उपयोग बढ़ाया गया है।
पंजाब के सभी सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है, और सार्वजनिक आयोजनों को रद्द कर दिया गया है। पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, "पंजाब के तीन करोड़ लोग हमारी सेना और पुलिस के साथ मजबूती से खड़े हैं। जब भी देश की एकता और सुरक्षा को खतरा होता है, पंजाबी हमेशा आगे आते हैं।"



