पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मौत मामले में पुलिस की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। शुरुआत में इसे हादसा माना गया था, लेकिन अब जांच एजेंसियां हत्या की साजिश के एंगल से मामले की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर कई नई बातें सामने आई हैं। हालांकि मामले की अंतिम सच्चाई अदालत और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
रेकी करने का पुलिस का दावा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी बनाए गए सिया गोयल और चेतन चौधरी ने कथित तौर पर मई महीने से ही लोहागढ़ किले का कई बार दौरा किया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि किले को पहले से देखा और समझा गया, ताकि वारदात को अंजाम देने के लिए जगह चुनी जा सके। इसी आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
मोबाइल डेटा बना अहम सुराग
जांच में पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं। अधिकारियों का दावा है कि फोन से कुछ चैट और कॉल रिकॉर्ड डिलीट किए गए थे। अब फॉरेंसिक टीम डिजिटल डेटा की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना से पहले दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी और क्या किसी सबूत को मिटाने की कोशिश की गई।
गवाह से जांच को मिली नई दिशा
पुलिस के अनुसार, चेतन चौधरी की दुकान पर काम करने वाला एक कर्मचारी इस मामले में अहम गवाह बनकर सामने आया है। जांच में दावा किया गया है कि घटना वाले दिन मोबाइल फोन बदलने की कोशिश की गई, जिससे लोकेशन छिपाई जा सके। लेकिन तकनीकी जांच में मिली जानकारी ने पुलिस के संदेह को और मजबूत कर दिया। इसी वजह से अब इस गवाह के बयान को काफी अहम माना जा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज भी जांच के दायरे में
पुलिस का कहना है कि किले और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की भी बारीकी से जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, फुटेज में कुछ गतिविधियां संदिग्ध दिखाई दी हैं। इन्हीं वीडियो और डिजिटल सबूतों को जोड़कर पुलिस पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार कर रही है। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
अभी जांच जारी, अंतिम सच बाकी
इस हाईप्रोफाइल मामले में हर दिन नए दावे और नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी डिजिटल, फॉरेंसिक और प्रत्यक्ष सबूतों की जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और दोष तय करने का अधिकार अदालत के पास होगा।
