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सिद्धांत बनाम पैसे का गणित-पैसे के आगे झुका पाकिस्तान

सिद्धांत बनाम पैसे का गणित-पैसे के आगे झुका पाकिस्तान

न्यूज प्लस डेस्क , अजीत सिंह। पाकिस्तान ने पहले भारत के खिलाफ टी-20 वर्ल्ड कप मैच का बहिष्कार करने का एलान किया। बड़े-बड़े शब्द बोले गए, सिद्धांत, स्वाभिमान और क्षेत्रीय एकजुटता की कसमें खाई गईं लेकिन महज़ नौ दिन में वही पाकिस्तान अपने ही फैसले से पीछे हट गया।

जो शुरुआत से तय था, वही हुआ आखिर पाकिस्तान ने यू-टर्न ले लिया, टी20 वर्ल्ड कप 2026 का ये हाईवोल्टेज ड्रामा अब खत्म हो चुका है। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर एलान कर दिया है कि वह 15 फरवरी को भारत के खिलाफ खेलने को तैयार है, अब सवाल यह नहीं कि पाकिस्तान खेलेगा या नहीं-सवाल ये है कि इतने भारी-भरकम बयान देकर आखिर फैसला पलटना क्यों पड़ा। बतादें एक फरवरी को जब पाकिस्तान ने जोश में आकर कहा था, हम भारत के खिलाफ नहीं खेलेंगे, तभी ज्यादातर क्रिकेट जानकारों ने कह दिया था, इनको आखिर में खेलना ही पड़ेगा। महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर उन पहले लोगों में थे, जिन्होंने तंज कसते हुए कहा था, इसमें नया क्या है, पाकिस्तान में खिलाड़ी रिटायर होते हैं और चार दिन में वापस आ जाते हैं, यहां भी ऐसा ही होगा और एक हफ्ते बाद ठीक वैसा ही हुआ।

सोचिए ज़रा, एक देश का प्रधानमंत्री संसद में खड़े होकर बहिष्कार की बात करें और कुछ दिन बाद उसी फैसले से पीछे हटना पड़े, तो उस देश की साख पर क्या असर पड़ता है। बीते सोमवार को पाकिस्तान सरकार का नया बयान आया, कहा गया, यह फैसला क्रिकेट की भावना को बचाने के लिए लिया गया है... बात सुनने में बहुत अच्छी लगी लेकिन भावना तब याद आई, जब विकल्प लगभग खत्म हो चुके थे। यह पहली बार नहीं है, मोहसिन नकवी के दौर में ये आदत बन चुकी है। पिछले साल एशिया कप में भी बहिष्कार की धमकी दी गई, फिर अचानक कहा गया, माफी मिल गई, मैच हुआ और मामला खत्म। इस बार फर्क बस इतना था कि सामने भारत था, जो दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट बाजार हैं, भारत-पाकिस्तान मैच ब्रॉडकास्ट की दुनिया में सोने की खान माना जाता है। इस एक मुकाबले की वैल्यू बताई जाती है 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा, अब ज़रा हिसाब लगाइए, जिस बोर्ड की सालाना कमाई, करीब 35-40 मिलियन डॉलर हो, वो 200 मिलियन डॉलर का मैच छोड़ दे, क्या ये मुमकिन था।

कागज़ पर ये क्रांति लगती थी, असल में ये पाक के लिए आत्मघाती कदम होता। बंद कमरों में फोन लगातार बज रहे थे, ब्रॉडकास्टर्स, स्पॉन्सर, आईसीसी, सब जवाब मांग रहे थे, बता दें पाकिस्तान की तरफ से ऐसी मांगें आईं, जिन्हें मानना नामुमकिन था, जैसे भारत के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट दोबारा शुरू कराया जाए, जिसके बाद आईसीसी ने सुना और साफ मना कर दिया। सच्चाई यही है, पाकिस्तान को भारत के खिलाफ इस मैच की जरूरत किसी और से ज्यादा थी। अगर टीम नहीं उतरती, तो स्पॉन्सर नाराज़ होते, ब्रॉडकास्टर्स छूट मांगते, और सबसे पहले सवाल पूछते अपने ही फैंस, इसलिए वापसी तय थी, बस समय का इंतज़ार था। अब कहा जा रहा है, बातचीत हुई, न्याय मिला, सिद्धांत बचा लिया गया, तकनीकी तौर पर सब सही हो सकता है।

लेकिन दुनिया ने देख लिया, असली धमकी कब खत्म हुई, जब हिसाब लगाया गया। 15 फरवरी को स्टेडियम भरा होगा, टीवी रेटिंग आसमान छुएगी, लोग चौके-छक्के याद रखेंगे और पाकिस्तान का यह ड्रामा भी। पर्दे के पीछे की कहानी, अब दर्ज हो चुकी है और वह कहावत तो आपने सुनी ही होगी, कोयला होय न ऊजलौ, सौ मन साबुन लाय, इसलिए अगली बार अगर पाकिस्तान फिर कोई नई धमकी दे, तो दुनिया शायद हैरान नहीं होगी। सब पहले से जानते होंगे, ये स्क्रिप्ट का हिस्सा है, अंत में पाक का यू-टर्न तय था, क्योंकि जब बार-बार पलटना आदत बन जाए, तो शब्दों की साख सबसे पहले खत्म होती है....।

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