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केरल दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू के हेलिकॉप्टर को झटका, टेकऑफ से पहले गड्ढे में फंसा पहिया

केरल दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू के हेलिकॉप्टर को झटका, टेकऑफ से पहले गड्ढे में फंसा पहिया

केरल के पठानमथिट्टा जिले में साबरीमाला मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हेलीकॉप्टर को एक छोटी लेकिन हैरान करने वाली घटना का सामना करना पड़ा। बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे प्रामाडम के राजीव गांधी इंडोर स्टेडियम के मैदान पर बने अस्थायी हेलीपैड पर लैंडिंग के तुरंत बाद हेलीकॉप्टर के पहियों हिलते कंक्रीट की सतह में धंस गए। हेलीपैड को रातोंरात तैयार किया गया था, जो अभी पूरी तरह से सेट नहीं हुआ था। सौभाग्य से, राष्ट्रपति पहले ही सुरक्षित उतर चुकी थीं और कोई नुकसान नहीं हुआ। स्थानीय पुलिस और फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज के जवानों ने मिलकर हेलीकॉप्टर को धक्का देकर सुरक्षित निकाल लिया।

यह घटना राष्ट्रपति की चार दिवसीय केरल यात्रा के दूसरे दिन हुई, जब वे साबरीमाला के भगवान अयप्पा मंदिर में थुलम मास पूजा के समापन के अवसर पर दर्शन करने पहुंचीं। राष्ट्रपति मुर्मू देश की पहली महिला राष्ट्राध्यक्ष हैं जो साबरीमाला मंदिर में पूजा करने जा रही हैं। इससे पहले 1970 के दशक में पूर्व राष्ट्रपति वी.वी. गिरी ने इस मंदिर का दौरा किया था। घटना के बावजूद राष्ट्रपति का कार्यक्रम निर्धारित अनुसार चला और वे सड़क मार्ग से पंबा पहुंचीं, जहां से ट्रेकिंग कर मंदिर तक गईं।

राष्ट्रपति मुर्मू मंगलवार शाम को तिरुवनंतपुरम पहुंची थीं। उनकी यात्रा का मुख्य आकर्षण साबरीमाला दर्शन था। मूल योजना के अनुसार, हेलीकॉप्टर निलक्कल (पंबा के पास) में 10:20 बजे लैंड करने वाला था। लेकिन मंगलवार देर रात मौसम की खराब स्थिति – तेज बारिश और हवाओं – के कारण लैंडिंग साइट बदल दी गई। पठानमथिट्टा जिले के प्रामाडम को वैकल्पिक स्थल चुना गया। यहां राजीव गांधी स्टेडियम के मैदान पर रात भर में तीन अस्थायी हेलीपैड तैयार किए गए। कंक्रीट डालने का काम मंगलवार देर रात ही पूरा हुआ, जिसके कारण सतह नरम बनी रही।

भारतीय वायुसेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर सुबह 8:30 बजे प्रामाडम पहुंचा। राष्ट्रपति उतरते ही स्थानीय अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। स्वागत समिति में देवास्वोम मंत्री वी.एन. वासावन, सांसद एंटो एंटनी, विधायक के.यू. जिनीश कुमार और प्रमोद नारायणन, जिला कलेक्टर एस. प्रेम कृष्णन तथा पुलिस अधीक्षक आर. आनंद शामिल थे। राष्ट्रपति ने सभी को प्रणाम किया और तुरंत सड़क मार्ग से पंबा रवाना हो गईं। लेकिन हेलीकॉप्टर अभी भी मैदान पर खड़ा था, जब उसके पहियों के नीचे कंक्रीट की सतह धंस गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "कंक्रीट पूरी तरह से सेट नहीं हुआ था। हेलीकॉप्टर के वजन से पहियों के नीचे डिप्रेशन बन गया। लेकिन यह कोई बड़ा खतरा नहीं था।"

वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि दर्जनों पुलिसकर्मी और फायर फोर्स के जवान हेलीकॉप्टर को धक्का देते हुए। वे चिल्ला रहे थे – "पुश, पुश!" – और करीब 15-20 मिनट में विमान को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को घटना की कोई जानकारी नहीं दी गई ताकि उनका कार्यक्रम प्रभावित न हो।

सुरक्षा चूक या तकनीकी खामी?

यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे "प्रशासनिक लापरवाही" करार दिया है। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष वी.डी. सतीशन ने कहा, "राष्ट्रपति जैसे उच्च पदाधिकारी की यात्रा के दौरान ऐसी चूक स्वीकार्य नहीं। हेलीपैड की गुणवत्ता जांच क्यों नहीं हुई?" वहीं, राज्य सरकार ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मौसम की वजह से आखिरी पल में बदलाव जरूरी था। मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया, "यह एक मामूली तकनीकी समस्या थी। राष्ट्रपति का पूरा कार्यक्रम सुचारू रूप से चला।"

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी हेलीपैड पर कंक्रीट डालने के बाद कम से कम 24-48 घंटे का समय देना चाहिए। एक विमानन इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हेलीकॉप्टर का वजन 10-12 टन होता है। नरम सतह पर लैंडिंग से ऐसा होना स्वाभाविक है। लेकिन प्रोटोकॉल के तहत वैकल्पिक साइट पर पहले टेस्ट लैंडिंग होनी चाहिए थी।"

राष्ट्रपति की यात्रा

राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा केरल के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन से जुड़ी है। साबरीमाला दर्शन के बाद वे शाम को तिरुवनंतपुरम लौटेंगी। गुरुवार को वे राजभवन में पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन की बस्ट का अनावरण करेंगी। इसके बाद वार्कला के शिवगिरि मठ में श्री नारायण गुरु की महासमाधि शताब्दी समारोह का उद्घाटन और कोट्टायम के सेंट थॉमस कॉलेज के प्लेटिनम जयंती समारोह में भाग लेंगी। यात्रा का समापन 24 अक्टूबर को एर्नाकुलम के सेंट टेरेसा कॉलेज के सेंटेनरी समारोह से होगा।

यह यात्रा आदिवासी पृष्ठभूमि वाली राष्ट्रपति मुर्मू के लिए खास है, जो सामाजिक समानता और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं। साबरीमाला, जो लाखों भक्तों का तीर्थस्थल है, वहां उनकी उपस्थिति महिलाओं के लिए प्रेरणादायक होगी।

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