बिहार विधानसभा चुनाव की रणभेरी के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने सोमवार को अपनी उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। कुल 143 नामों वाली इस सूची में 24 महिला उम्मीदवारों को जगह दी गई है, जो पार्टी की महिलाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सूची में पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को रघोपुर विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है, जबकि अन्य प्रमुख नामों में ललित यादव (दरभंगा ग्रामीण), दिलीप सिंह (बारौली) और सवित्री देवी (चकाई) शामिल हैं। हालांकि, इस घोषणा ने महागठबंधन में नई खटास पैदा कर दी है, क्योंकि आरजेडी ने अपने सहयोगी कांग्रेस के खिलाफ तीन सीटों पर तथा विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के खिलाफ दो सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए हैं। कुल मिलाकर पांच सीटों पर 'फ्रेंडली फाइट' की स्थिति बन गई है, जो गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है।
आरजेडी की यह सूची महागठबंधन की सीट बंटवारे की अनौपचारिक रूपरेखा को भी स्पष्ट करती है। पार्टी 143 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस को 61, भाकपा-माले को 20 तथा वीआईपी को शेष सीटें मिलेंगी। सूची जारी होने से ठीक पहले नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि समाप्त हो रही थी, जिससे यह कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया। तेजस्वी यादव ने सूची जारी करते हुए कहा, "यह सूची बिहार की जनता की आवाज है। हम जातिगत जनगणना और रोजगार के वादों पर चुनाव लड़ेंगे। गठबंधन मजबूत है, लेकिन जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।" हालांकि, पार्टी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने स्पष्ट किया कि ओवरलैपिंग सीटों पर अंतिम निर्णय नेताओं की बैठक में होगा।
महागठबंधन में यह टकराव कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ दिनों से सीट बंटवारे पर बातचीत अटकी हुई है। कांग्रेस ने अपनी दूसरी सूची जारी कर पांच और नामों की घोषणा की, जिससे उसकी कुल उम्मीदवारों की संख्या 53 हो गई। इसमें नरकटियागंज से शास्वत केदार पांडेय, किशनगंज से कमरुल होदा, कसबा से इरफान आलम, पूर्णिया से जितेंद्र यादव और गया टाउन से मोहन श्रीवास्तव शामिल हैं। लेकिन आरजेडी ने वैशाली, लालगंज और कहलगांव सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस को चौंका दिया। वैशाली से आरजेडी का उम्मीदवार राघवेंद्र सिंह हैं, जबकि कांग्रेस ने यहां राघव शर्मा को टिकट दिया। लालगंज में आरजेडी की ओर से विजय सिंह और कहलगांव में राजनिश भारती मैदान में हैं, जो क्रमशः कांग्रेस के अमर सिंह और प्रवीण सिंह कुशवाहा के खिलाफ होंगे। इसके अलावा, तारापुर और गौरा बोराम सीटों पर वीआईपी के खिलाफ आरजेडी के प्रत्याशी उतरेंगे।
कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने तेजस्वी यादव पर 'साजिश रचने' का आरोप लगाते हुए कहा, "वह एआईसीसी बैठक में सहयोगी के रूप में आए थे, लेकिन अब गठबंधन को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। दलित प्रतिनिधित्व को कमजोर करने का यह प्रयास अस्वीकार्य है।" राम ने कुटुंबा सीट का उदाहरण दिया, जहां आरजेडी ने सुरेश पासवान को उतार दिया, जबकि यह सीट एससी आरक्षित है और कांग्रेस के पास है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान न हुआ तो 'फ्रेंडली फाइट' वास्तविक टकराव में बदल सकती है।
आरजेडी प्रवक्ता तिवारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "गठबंधन में ऐसी स्थितियां आती रहती हैं। आरजेडी केवल बिहार और झारखंड में चुनाव लड़ती है, जबकि कांग्रेस को कर्नाटक, राजस्थान जैसे राज्यों में हमारी मांग नहीं करनी पड़ती। जमीनी हकीकत समझें। अभी समय है, महागठबंधन के शीर्ष नेता बैठक कर सब सुलझा लेंगे।" तिवारी ने जोर देकर कहा कि कुटुंबा सीट पर टकराव की अफवाहें निराधार हैं और पार्टी ने वहां उम्मीदवार नहीं उतारा। फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि ये 'फ्रेंडली फाइट' गठबंधन की वोट बैंक को विभाजित कर सकती हैं, खासकर एनडीए के पक्ष में।
बिहार की राजनीति हमेशा से जटिल रही है। 2020 के चुनावों में महागठबंधन ने 110 सीटें जीती थीं, लेकिन सरकार बनाने से चूक गए। अब 2025 में एनडीए की अगुवाई वाले बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को कड़ी टक्कर देने के लिए विपक्ष एकजुट दिखने को बेताब है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तीन दिवसीय बिहार यात्रा इसी बीच शुरू हुई है, जहां वे सारण में रैली को संबोधित करेंगे। एनडीए ने अभी तक अपनी सूची जारी नहीं की, लेकिन जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने कहा है कि सीट बंटवारा तय हो चुका है।
आरजेडी की सूची में महिलाओं को प्रमुखता दी गई है। इसमें सवित्री देवी (चकाई), रेणु कुशवाहा (बिहारिगंज), अनीता देवी महतो (वर्षालीगंज), माला पुष्पम (हसनपुर), संध्या रानी कुशवाहा (मधुबन), रितु प्रिया चौधरी (इमामगंज-एससी), तनुश्री मांझी (बराचट्टी-एससी), चंदनी देवी सिंह (बनियापुर), प्रेमा चौधरी (पटेपुर-एससी) और अन्य शामिल हैं। पार्टी ने अनुसूचित जाति और जनजाति सीटों पर भी मजबूत दावेदार उतारे हैं, जैसे राम विलास पासवान (पिरपैंती-एससी)। यह कदम दलित-मुस्लिम-यादव (एमवाई) समीकरण को मजबूत करने का प्रयास लगता है।
चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे, जबकि मतगणना 14 नवंबर को। कुल 243 सीटों पर सरगर्मियां चरम पर हैं। आरजेडी की इस घोषणा से विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है, लेकिन क्या यह गठबंधन को मजबूत करेगी या कमजोर? विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय में नाम वापसी से मुद्दा सुलझ सकता है, लेकिन वोटरों का विश्वास जीतना अब बड़ी चुनौती है।
महागठबंधन के आंतरिक कलह के बीच एनडीए को फायदा मिल सकता है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने ट्वीट कर कहा, "विपक्ष की लड़ाई खुद से हो रही है, जनता सब देख रही है।" वहीं, जेडीयू के आरसीपी सिंह ने चुटकी ली, "गठबंधन नाम का जाप कर रहे हैं, लेकिन काम तो टूटने का हो रहा।" ये बयान बिहार की राजनीति को और रोचक बना रहे हैं।



