प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने आधिकारिक आवास पर भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए खास रही क्योंकि शुभांशु शुक्ला पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर सफल मिशन पूरा किया।
इस मुलाकात में दोनों के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में "होमवर्क" को लेकर मजेदार बातचीत हुई, जिसने सबका ध्यान खींचा। साथ ही, भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन और अंतरिक्ष अनुसंधान में देश की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर भी चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान शुभांशु ने पीएम मोदी को एक्सिओम-4 मिशन का पैच और वह भारतीय तिरंगा भेंट किया, जो उन्होंने आईएसएस पर अपने साथ ले जाया था। यह तिरंगा 29 जून को पीएम मोदी के साथ उनकी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान आईएसएस पर लहरा रहा था।
पीएम मोदी का सोशल मीडिया पोस्ट
मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "शुभांशु शुक्ला के साथ शानदार बातचीत हुई। हमने अंतरिक्ष में उनके अनुभव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति और भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन सहित कई विषयों पर चर्चा की। भारत को उनके इस उपलब्धि पर गर्व है।
पीएम मोदी ने शुभांशु से मजाकिया अंदाज में पूछा, "आपने वह होमवर्क किया, जो मैंने आपको दिया था?" इस सवाल का जिक्र शुभांशु ने हंसते हुए किया और बताया कि उनके सहयोगियों ने इस बात को लेकर उनकी खिंचाई भी की थी। शुभांशु ने जवाब दिया, "लोग मुझसे मजाक करते थे कि 'आपके प्रधानमंत्री आपको होमवर्क देते हैं!' लेकिन मैंने वह होमवर्क अच्छे से याद रखा और पूरा किया।"
यह "होमवर्क" दरअसल पीएम मोदी द्वारा दी गई जिम्मेदारी थी, जिसमें शुभांशु को अपने मिशन के हर पहलू को दस्तावेज करने और भारत के गगनयान कार्यक्रम के लिए उपयोगी जानकारी इकट्ठा करने को कहा गया था। शुभांशु ने बताया कि उन्होंने इस कार्य में काफी प्रगति की है और यह भारत के भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों, विशेष रूप से गगनयान, के लिए महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने इस पर संतोष जताया और कहा कि यह केवल शुरुआत है, भारत को अब 50 अंतरिक्ष यात्रियों का एक बड़ा पूल तैयार करने की जरूरत है।
अंतरिक्ष अनुभव और गगनयान मिशन
शुभांशु शुक्ला ने अपने 18 दिन के आईएसएस मिशन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में रहने के दौरान शरीर को कई बदलावों से गुजरना पड़ता है। पृथ्वी पर लौटने के बाद उन्हें दोबारा गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल होने में समय लगा। उन्होंने कहा, "दिमाग को यह समझने में वक्त लगता है कि अब हमें चलना है।
उन्होंने पीएम मोदी को अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरें दिखाईं और शून्य गुरुत्वाकर्षण में किए गए प्रयोगों के बारे में बताया। इनमें टार्डीग्रेड्स, मायोजेनेसिस, मेथी और मूंग के अंकुरण, सायनोबैक्टीरिया, माइक्रोएल्गी और फसल के बीजों से संबंधित प्रयोग शामिल थे। ये प्रयोग गगनयान मिशन और लंबी अवधि के अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण हैं।
शुभांशु ने यह भी बताया कि उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोगी भारत के गगनयान मिशन को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, "पिछले एक साल में, मैं जहां भी गया, लोग मुझसे मिलकर उत्साहित थे और भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान के बारे में जानना चाहते थे। कई लोगों को गगनयान मिशन के बारे में मुझसे ज्यादा जानकारी थी, वे पूछते थे कि यह कब लॉन्च होगा।"
शुभांशु ने भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान में बढ़ती वैश्विक साख पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "दुनियाभर में लोग भारत की प्रगति को देख रहे हैं और इसे सराह रहे हैं।" पीएम मोदी ने इस बात पर गर्व जताया और कहा कि शुभांशु का मिशन न केवल भारत के लिए बल्कि देश के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा, "आपका यह मिशन बच्चों को अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए प्रेरित करेगा।"



