फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी ब्रिजिट मैक्रों ने एक सनसनीखेज मामले में वैज्ञानिक और फोटोग्राफिक सबूत पेश करने का फैसला किया है, जिसमें वह साबित करेंगी कि वह जन्म से ही एक महिला हैं। यह कदम अमेरिकी अदालत में दायर एक मानहानि के मुकदमे के तहत उठाया जा रहा है, जहां दक्षिणपंथी प्रभावशाली कैंडेस ओवेन्स पर आरोप है कि उन्होंने ब्रिजिट के खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाईं।
ब्रिजिट मैक्रों, जो 71 वर्षीय पूर्व शिक्षिका हैं, लंबे समय से विवाद का शिकार रही हैं। दावा किया जाता है कि ब्रिजिट जन्म से पुरुष थीं और उन्होंने लिंग परिवर्तन कराया है। यह अफवाहें मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर फैलीं, जहां कुछ यूजर्स ने दावा किया कि ब्रिजिट का असली नाम जीन-मिशेल ट्रोग्नेउक्स है और वह इमैनुएल मैक्रों की शिक्षिका रहते हुए उन्हें "ग्रूम" किया। इन अफवाहों को अमेरिकी पॉडकास्टर कैंडेस ओवेन्स ने बार-बार बढ़ावा दिया, जिसके कारण मैक्रों दंपति ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है।
फ्रांस में पहले दायर एक मुकदमे में मैक्रों दंपति को हार मिली थी, लेकिन अब वे अमेरिका में इस मामले को आगे बढ़ा रहे हैं। ब्रिजिट के वकील ने कहा है कि वे "वैज्ञानिक प्रमाण" और पुरानी तस्वीरें अदालत में पेश करेंगी, जो साबित करेंगी कि ब्रिजिट हमेशा से महिला रही हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और बचपन की फोटोज शामिल हो सकती हैं।
क्या कहा मैक्रों दंपति ने?
इमैनुएल मैक्रों ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह न केवल मेरी पत्नी के सम्मान पर हमला है, बल्कि महिलाओं के खिलाफ ट्रांसफोबिक पूर्वाग्रहों का उदाहरण है। हम इन झूठी अफवाहों को वैज्ञानिक तथ्यों से खत्म करेंगे।" ब्रिजिट ने खुद कहा है कि ये अफवाहें उनके परिवार को गहरा दुख पहुंचा रही हैं और वे न्याय की उम्मीद कर रही हैं।
कैंडेस ओवेन्स का पक्ष
कैंडेस ओवेन्स, जो एक दक्षिणपंथी कमेंटेटर हैं, ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने अपने पॉडकास्ट में कहा, "मैंने केवल सार्वजनिक जानकारी पर आधारित सवाल उठाए हैं। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है।" हालांकि, उनके दावों को कई मीडिया आउटलेट्स ने झूठा और ट्रांसफोबिक करार दिया है।
वैश्विक प्रतिक्रिया
यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहा है। फेमिनिस्ट ग्रुप्स ने मैक्रों दंपति का समर्थन किया है, जबकि कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने इसे "सेंसरशिप" का उदाहरण बताया। ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा है कि ऐसे साजिश सिद्धांत ट्रांस समुदाय को नुकसान पहुंचाते हैं और महिलाओं की पहचान पर सवाल उठाते हैं।



