logo

header-ad
header-ad
पटना पारस अस्पताल हत्याकांड: अब तक 8 गिरफ्तार, 5 पुलिसकर्मी निलंबित

पटना पारस अस्पताल हत्याकांड: अब तक 8 गिरफ्तार, 5 पुलिसकर्मी निलंबित

बिहार की राजधानी पटना के पारस अस्पताल में 17 जुलाई 2025 को गैंगस्टर चंदन मिश्रा की हत्या के मामले ने पूरे देश में सनसनी मचा दी। इस सनसनीखेज हत्याकांड में पांच हमलावरों ने अस्पताल के आईसीयू में घुसकर चंदन मिश्रा को गोली मार दी थी।

बिहार मे अपराध दिन पर दिन बढ़ता ही जा रही है लेकिन इस घटना के बाद बिहार पुलिस और पश्चिम बंगाल की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें मुख्य शूटर तौसीफ बादशाह भी शामिल है। साथ ही, ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में (SI) समेत 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

चंदन मिश्रा, बक्सर जिले का रहने वाला एक कुख्यात अपराधी था, जिसके खिलाफ हत्या समेत कई आपराधिक मामले दर्ज थे। वह बक्सर सेंट्रल जेल में हत्या के एक मामले में सजा काट रहा था और मेडिकल आधार पर पैरोल पर रिहा हुआ था। 17 जुलाई को सुबह पांच हमलावरों ने पटना के पारस अस्पताल में घुसकर चंदन मिश्रा पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों को मिश्रा के कमरे में घुसते और गोलीबारी के बाद मोटरसाइकिल से फरार होते देखा गया। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए।

घटना पर प्रसाशन अलर्ट

घटना के बाद बिहार पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और पश्चिम बंगाल पुलिस के साथ मिलकर कोलकाता में छापेमारी की। 19 जुलाई 2025 को सुबह कोलकाता के न्यू टाउन में एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स से 5 लोगों को हिरासत में लिया गया, जो कथित तौर पर हमलावरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान कर रहे थे। इसके बाद, 19 जुलाई की देर रात और 20 जुलाई को कोलकाता के आनंदपुर में एक गेस्ट हाउस से मुख्य शूटर तौसीफ बादशाह सहित 3 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में शामिल हैं:

पुलिस के मुकाबिक आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद, एक वाहन, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए हैं। तौसीफ बादशाह ने हत्या के बाद कोलकाता में शरण ली थी और नए सिम कार्ड का उपयोग कर रहा था, लेकिन पुलिस ने आईएमईआई डेटा के जरिए उसका पता लगाया। सभी आरोपियों को कोलकाता की एक अदालत में पेश किया गया, जहां बिहार पुलिस ने उनकी ट्रांजिट रिमांड की मांग की।

पुलिस पर एक्शन

पटना के शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन में तैनात 5 पुलिसकर्मियों को ड्यूटी में लापरवाही के लिए 19 जुलाई 2025 को निलंबित कर दिया गया। इनमें एक सब-इंस्पेक्टर, दो सहायक सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) और दो कांस्टेबल शामिल हैं। पटना (सेंट्रल) की पुलिस अधीक्षक दीक्षा ने बताया कि इन पुलिसकर्मियों को अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था में चूक के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। इसके अलावा, तीन अन्य पुलिसकर्मी—एक सब-इंस्पेक्टर और दो एएसआई—को भी अन्य स्थानों पर सामान्य ड्यूटी में लापरवाही के लिए निलंबित किया गया, हालांकि ये निलंबन हत्याकांड से संबंधित नहीं हैं।

पटना (सेंट्रल) की पुलिस अधीक्षक दीक्षा ने इस घटना को गंभीर बताया और कहा कि जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि हमलावर बिना किसी सुरक्षा जांच के मिश्रा के कमरे तक कैसे पहुंचे। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि पांच हमलावर बिना किसी रोक-टोक के अस्पताल के दूसरे माले तक पहुंचे और गोलीबारी के बाद आसानी से फरार हो गए। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस हत्याकांड में कोई और साजिश शामिल थी।

पुलिस का मानना है कि इस हत्या का मास्टरमाइंड चंदन मिश्रा का बचपन का दोस्त ओंकारनाथ सिंह उर्फ शेरू है। मिश्रा और शेरू का आपराधिक इतिहास 2009 से शुरू हुआ, जब वे एक जुवेनाइल होम में थे। दोनों ने मिलकर भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर जिलों में एक गैंग बनाया, जो कई अपराधों में शामिल था, जिसमें एक पुलिसकर्मी और एक कोचिंग सेंटर संचालक की हत्या भी शामिल है। मिश्रा को 2014 में कोलकाता में एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उसे बक्सर और फिर भागलपुर सेंट्रल जेल में स्थानांतरित किया गया।

पटना के पारस अस्पताल में चंदन मिश्रा की हत्या ने बिहार में अपराध और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोलकाता में आठ लोगों की गिरफ्तारी और पांच पुलिसकर्मियों के निलंबन से यह साफ है कि पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है। हालांकि, मुख्य साजिशकर्ता और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच अभी जारी है। यह घटना न केवल अस्पतालों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी को उजागर करती है, बल्कि बिहार में संगठित अपराध से निपटने की चुनौतियों को भी सामने लाती है।

Leave Your Comment