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भारत से दुश्मनी पाक को पड़ी भारी, सिंधु डेल्टा में पानी 80% घटा

भारत से दुश्मनी पाक को पड़ी भारी, सिंधु डेल्टा में पानी 80% घटा

भारत के सिंधु नदी के फैसले से पकिस्तान गहरे संकट मे है। सिंधु नदी डेल्टा, जो कभी खेती, मछली पालन, और मैंग्रोव वनों के लिए प्रसिद्ध था, आज एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है।

आपको बता दें सिंधु नदी के पानी में 80% की कमी, समुद्री जल का अतिक्रमण, और बड़े पैमाने पर पलायन ने इस क्षेत्र को तबाही के कगार पर ला खड़ा किया है। 1950 के दशक से सिंधु डेल्टा में पानी का बहाव 80% कम हो गया है। आपको बता दें 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल समझौते के तहत, सिंधु, झेलम, और चिनाब नदियों का पानी मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। हालांकि, हाल ही में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस समझौते को निलंबित कर दिया, जिससे पानी का प्रवाह और कम हुआ है।

पानी लगभग खत्म

सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियों का पानी बड़े पैमाने पर सिंचाई नहरों और जलविद्युत बांधों के लिए उपयोग किया जा रहा है। इससे डेल्टा तक पहुंचने वाला पानी लगभग खत्म हो गया है। हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियर, जो सिंधु नदी का 75% पानी प्रदान करते हैं, तेजी से पिघल रहे हैं। इससे पानी की उपलब्धता अनिश्चित हो गई है। पाकिस्तान सरकार की इस योजना के तहत, सिंधु नदी से चार प्रांतों में छह नहरें बनाई जा रही हैं, जिससे डेल्टा में पानी की आपूर्ति और प्रभावित हो रही है।

सिंधु नदी को पाकिस्तान की जीवन रेखा कहा जाता है, जो देश की 80% कृषि भूमि की सिंचाई करती है। डेल्टा क्षेत्र के विनाश ने लाखों लोगों की आजीविका को प्रभावित किया है। खारो चान जैसे कस्बों में, जो कभी समृद्ध थे, अब केवल सुनसान गांव और आवारा कुत्तों का बसेरा है। 1981 में खारो चान की आबादी 26,000 थी, जो 2023 में घटकर 11,000 रह गई।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था फैसला

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत ने चिनाब नदी पर बगलिहार बांध और झेलम नदी पर किशनगंगा बांध के जरिए पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना शुरू कर दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास अभी इतना बुनियादी ढांचा नहीं है कि वह पाकिस्तान को जाने वाला पूरा पानी रोक सके। फिर भी, प्रवाह को नियंत्रित करने से पाकिस्तान की कृषि और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को "युद्ध की कार्रवाई" करार दिया है, जबकि भारत का कहना है कि यह कदम आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई है।

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