प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश के किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
6 अगस्त को लगाए गए अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा के बीच पीएम मोदी ने बिना अमेरिका या टैरिफ का नाम लिए स्पष्ट किया कि भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि इसके लिए मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। मेरे देश के किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के लिए भारत तैयार है।"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो रूस से तेल आयात को लेकर भारत को "सजा" देने के लिए था। इसके बाद, बुधवार (6 अगस्त 2025) को ट्रंप ने टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। अमेरिका चाहता है कि भारत अपने उच्च टैरिफ (20-100%) और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाए ताकि अमेरिकी कृषि उत्पाद जैसे सेब, बादाम, अखरोट, और जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों (सोयाबीन और मक्का) को भारतीय बाजार में आसानी से प्रवेश मिल सके। भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वह अपने कृषि और डेयरी क्षेत्रों को विदेशी उत्पादों के लिए पूरी तरह नहीं खोलेगा, क्योंकि इससे स्थानीय किसानों और पशुपालकों को नुकसान होगा।
पीएम मोदी का कड़ा रुख
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "हमारे लिए अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरे भाई-बहनों के हितों के साथ कभी भी समझौता नहीं करेगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती पर खर्च कम करने और नए आय स्रोत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनकी सरकार ने किसानों की ताकत को देश की प्रगति का आधार माना है, और पिछले वर्षों में बनी नीतियों का उद्देश्य न केवल मदद करना बल्कि किसानों में विश्वास जगाना भी रहा है।
मोदी ने कहा कि भारत ने सोयाबीन, सरसों और मूंगफली के उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हासिल की है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने 'आत्मनिर्भर भारत' के मंत्र को दोहराते हुए वैश्विक दबावों के आगे न झुकने का संकल्प जताया।
एम.एस. स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि
सम्मेलन के दौरान, पीएम मोदी ने महान कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर एम.एस. स्वामीनाथन को श्रद्धांजलि दी और उनकी जन्मशती के अवसर पर एक स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी किया। उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन ने विज्ञान को जनसेवा का माध्यम बनाया और देश की खाद्य सुरक्षा को अपने जीवन का ध्येय बनाया। मोदी ने बताया कि स्वामीनाथन के मार्गदर्शन में शुरू की गई मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने गुजरात में कृषि को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
आपको बता दें एम.एस. स्वामीनाथन (M. S. Swaminathan) शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 7 से 9 अगस्त तक चलेगा और इसका आयोजन एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), और राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी के सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन का विषय "सदाबहार क्रांति: जैव-सुख का मार्ग" है, जो स्वामीनाथन के योगदान को दर्शाता है। इस दौरान जलवायु अनुकूल कृषि, जैव विविधता संरक्षण, और महिला व युवा सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।



