ओडिशा में निवेशकों को विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) ट्रेडिंग के नाम पर लूटने वाले एक विशाल घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। हेजगेक्स फंड एलएलपी नामक कंपनी ने 10 राज्यों में फैले इस पोंजी स्कीम के जरिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। ओडिशा में ही 12,000 से ज्यादा निवेशक फंस चुके हैं, जिनका नुकसान करीब 139 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने शनिवार को राज्य प्रमुख प्रताप कुमार राउत को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी निवेशक बिजय कुमार पणिग्राही की शिकायत पर दर्ज मामले में हुई है, जिन्होंने अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स के 92.60 लाख रुपये गंवा दिए।
यह घोटाला न केवल ओडिशा बल्कि आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और दिल्ली जैसे 10 राज्यों में फैला हुआ था। कुल मिलाकर 3 लाख से अधिक निवेशकों को चूना लगाया गया। कंपनी ने 2023 में गोवा के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन वास्तव में यह एक क्लासिक पोंजी स्कीम थी, जहां शुरुआती निवेशकों को छोटे-मोटे रिटर्न देकर नए निवेशकों को लुभाया जाता था। जब फंड जमा हो गया, तो कंपनी ने अचानक संचालन बंद कर दिया और संपर्क तोड़ लिया।
कैसे हुआ घोटाला?
हेजगेक्स फंड के प्रतिनिधियों ने निवेशकों को 11 से 18 प्रतिशत मासिक रिटर्न का लालच दिया। दावा किया गया कि पैसा फॉरेक्स मार्केट में निवेश होगा, जो पूरी तरह सुरक्षित और वैध है। प्रताप राउत, जो कंपनी का ओडिशा प्रमुख था, ने कटक और भुवनेश्वर में प्रमोशनल मीटिंग्स आयोजित कीं। इन मीटिंग्स में उन्होंने खुद को 'ओडिशा कोऑर्डिनेटर' बताते हुए निवेशकों को भरोसा दिलाया कि यह कोई मनी रोटेशन स्कीम नहीं है। राउत ने डिजाइनेटेड पार्टनर्स दिनेश कुमार जैन और कुलदीप सिंह पनवार का हवाला देते हुए कहा कि वे कंपनी के टॉप मैनेजमेंट से लगातार संपर्क में हैं।
निवेशक बिजय कुमार पणिग्राही का मामला इसकी मिसाल है। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपनी पूरी सेविंग्स, यानी 92.60 लाख रुपये, कंपनी में जमा कर दिए। राउत ने उन्हें बैंक अकाउंट नंबर दिए, जिनमें ट्रांसफर के साथ-साथ कैश और हवाला के जरिए भी पैसे जमा कराए गए। शुरुआत में कुछ महीनों तक मासिक रिटर्न मिलते रहे, जो बैंक अकाउंट में सीधे क्रेडिट होते थे। इससे अन्य निवेशकों का भरोसा बढ़ा। लेकिन कुछ महीनों बाद कंपनी ने पेमेंट रोक दिया। जब पणिग्राही ने राउत से संपर्क किया, तो उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही रिफंड हो जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पणिग्राही ने 14 अक्टूबर 2025 को ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर केस दर्ज हुआ।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि कंपनी ने कई सिस्टर कंसर्न्स जैसे कौशल्या फाउंडेशन, लव्या वर्ल्ड, फ्रिक्स मार्केट और लव्या इंटरनेशनल बनाईं, ताकि फंड ट्रेल छिपाई जा सके। पैसे मल अकाउंट्स, थर्ड-पार्टी अकाउंट्स और हवाला नेटवर्क के जरिए इकट्ठा किए जाते थे। आरोपी अक्सर अकाउंट बदलते रहते थे, ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो। ओडिशा में ही 12,000 से ज्यादा लोग फंस गए, जिनमें ज्यादातर मध्यम वर्ग के रिटायर्ड लोग, छोटे व्यापारी और नौकरीपेशा व्यक्ति शामिल हैं। एक अनुमान के मुताबिक, राज्य में औसतन हर प्रभावित व्यक्ति ने 1-2 लाख रुपये निवेश किए थे।
पुलिस कार्रवाई
शनिवार को ईओडब्ल्यू ने कटक के झिंकिरिया इलाके से प्रताप राउत को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से कई आपराधिक दस्तावेज बरामद हुए, जो घोटाले की पूरी साजिश को उजागर करते हैं। राउत को कटक की डेजिग्नेटेड कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे रिमांड पर लिया गया है। ईओडब्ल्यू के एडिशनल एसपी ने बताया कि जांच जारी है और मनी ट्रेल ट्रेस करने के लिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) से सहयोग लिया जा रहा है। अभी तक दिनेश कुमार जैन और कुलदीप सिंह पनवार जैसे अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस का मानना है कि घोटाले का मास्टरमाइंड गोवा या दिल्ली में छिपा हो सकता है।
ओडिशा पुलिस ने अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी संपर्क किया है, ताकि समन्वित कार्रवाई हो सके। ईओडब्ल्यू ने निवेशकों से अपील की है कि वे अपनी शिकायतें दर्ज कराएं, ताकि फंड रिकवरी में मदद मिले। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "यह स्कीम हाई-टेक तरीके से चलाई गई थी। हम डिजिटल फॉरेंसिक और बैंक रिकॉर्ड्स की जांच कर रहे हैं। जल्द ही अन्य गिरफ्तारियां होंगी।"
जीवन भर की कमाई पर पानी
इस घोटाले ने ओडिशा के हजारों परिवारों की जिंदगी बर्बाद कर दी है। बिजय पणिग्राही जैसे कई निवेशक अब बुढ़ापे में आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। एक अन्य प्रभावित निवेशक, नाम न छापने की शर्त पर, ने बताया, "हमने सोचा था कि यह सुरक्षित निवेश है। रिटर्न मिलने लगे तो भरोसा हो गया। अब सब कुछ खो चुके हैं।" राज्य में कई जगहों पर प्रभावित निवेशकों ने प्रदर्शन भी किए, लेकिन पुलिस ने आश्वासन दिया कि न्याय मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे पोंजी स्कीम्स बढ़ रहे हैं क्योंकि लोग हाई रिटर्न के लालच में पड़ जाते हैं। सेबी और आरबीआई ने पहले ही चेतावनी जारी की है कि फॉरेक्स ट्रेडिंग में अनियमित कंपनियों से बचें। ओडिशा सरकार ने भी निवेश जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है।



