नेपाल की राजनीति में शनिवार सुबह बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे देश में राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
जेन-जी आंदोलन से जुड़ा पूरा मामला
यह गिरफ्तारी सितंबर 2025 में हुए जेन-जी आंदोलन से जुड़ी है। उस समय युवा बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे। 8 सितंबर को काठमांडू में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें कई युवाओं की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए।
आरोपों के बाद बढ़ा दबाव
उस समय देश के प्रधानमंत्री रहे ओली पर आरोप लगा कि उन्होंने ही कार्रवाई के आदेश दिए थे। आंदोलन इतना तेज हुआ कि अगले ही दिन उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में बनी जांच आयोग ने भी उन्हें जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ केस चलाने की सिफारिश की।
गिरफ्तारी के बाद आगे की प्रक्रिया
पुलिस ने ओली को भक्तपुर स्थित उनके घर से हिरासत में लिया और फिर मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, उन पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। अब इस मामले में अदालत का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव में भी झेलनी पड़ी हार
हाल ही में हुए चुनाव में भी ओली को बड़ा झटका लगा था। उन्हें बालेन शाह ने उनके ही क्षेत्र में हराया। बालेन शाह को भारी मतों से जीत मिली और अब वे देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं। इस हार ने पहले ही ओली की राजनीतिक स्थिति कमजोर कर दी थी।
लंबे सफर का नया मोड़
केपी शर्मा ओली का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। वह कई बार प्रधानमंत्री रहे और देश के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। लेकिन अब उनकी गिरफ्तारी को नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां युवाओं की आवाज मजबूत होती नजर आ रही है।
