नेपाल में हाल के दिनों में भारी अशांति और हिंसक प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता के खिलाफ शुरू हुआ 'जेन-ज़ेड आंदोलन' हिंसक रूप ले चुका है। इस अशांति के चलते नेपाल की सेना ने देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है और पूरे देश में कर्फ्यू लागू कर दिया है। फिर भी, हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है।
नेपाल में हालात तब बिगड़े जब सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, और एक्स जैसे 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। यह प्रतिबंध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना गया, जिसके विरोध में जेन-ज़ेड पीढ़ी सड़कों पर उतर आई। शुरू में शांतिपूर्ण रहे ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने संसद, सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री निवास, और सिंहदरबार सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ की। इस अशांति के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिससे देश में राजनीतिक शून्य पैदा हो गया।
सेना का नियंत्रण
हिंसा को नियंत्रित करने के लिए नेपाली सेना ने मंगलवार रात 10 बजे से पूरे देश की कमान अपने हाथ में ले ली। सेना ने बुधवार (10 सितंबर 2025) को शाम 5 बजे से गुरुवार सुबह 6 बजे तक देशव्यापी कर्फ्यू लागू किया। इस दौरान केवल आपातकालीन वाहनों जैसे एम्बुलेंस, दमकल, और सुरक्षा वाहनों को आवाजाही की अनुमति दी गई। सेना ने त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सिंहदरबार जैसे रणनीतिक स्थानों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। सेना प्रमुख अशोक राज सिगदेल ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और बातचीत के लिए आगे आने की अपील की है।
नेपाली सेना के जनसंपर्क एवं सूचना निदेशालय ने बयान जारी कर कहा, "वर्तमान विषम परिस्थितियों का लाभ उठाकर कुछ समूह सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। आगजनी, लूटपाट, और हिंसक हमलों को दंडनीय अपराध माना जाएगा।" सेना ने सभी नागरिकों से सहयोग की अपील की और स्थिति का पुनर्मूल्यांकन कर आगे की जानकारी देने का वादा किया।
हिंसा का दौर
सेना के नियंत्रण के बावजूद, नेपाल में हिंसा कम नहीं हुई है। प्रदर्शनकारियों ने तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों शेर बहादुर देउबा, झालानाथ खनाल, और पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' के घरों में आग लगा दी। सबसे दुखद घटना में पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल की पत्नी राजलक्ष्मी की आगजनी में मृत्यु हो गई। काठमांडू और अन्य शहरों में हिंसक झड़पों में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 22 काठमांडू और 2 ईटहरी में मारे गए। 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकारी दफ्तरों, मॉल, और निजी संपत्तियों को निशाना बनाया। कपिलवस्तु जेल पर हमले के बाद 459 कैदी फरार हो गए, जिससे भारत में घुसपैठ की आशंका बढ़ गई है। इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
नेपाल में कोई सरकार न होने से देश गहरे संकट में है। नेपाली कांग्रेस और अन्य गठबंधन दलों ने अंतरिम या राष्ट्रीय सरकार बनाने की चर्चा शुरू की है। सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन हिंसा के कारण यह प्रक्रिया जटिल हो गई है। कुछ लोग रैपर और म्यूजिशियन बालेंद्र शाह को नए नेतृत्व के रूप में देख रहे हैं, जो जेन-ज़ेड आंदोलन का प्रतीक बन गए हैं।
नेपाल के हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की और हिंसा की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। रूस ने भी नेपाल में शांति बहाली की वकालत की और अपने नागरिकों को वहां यात्रा न करने की सलाह दी। भारत ने नेपाल के हालात पर पैनी नजर रखी है और शांति बहाली में मदद की पेशकश की है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति की अपील की, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए।



